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जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों से बदसलूकी और पुलिसिया बर्बरता पर भड़का IJU ; एसीपी पर कार्रवाई की मांग

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नई दिल्ली। 6 अक्तूबर, 2026 . देश में पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन’ (आईजेयू) ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों, विशेषकर महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसकी तीखी निंदा की है।

सोमवार (5 अक्टूबर 2026) को जारी एक संयुक्त बयान में आईजेयू के अध्यक्ष बलविंदर सिंह जम्मू और महासचिव डी. सोम सुंदर ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय करार दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि पुरुष पुलिसकर्मियों—जिनमें सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर का एक अधिकारी भी शामिल है—द्वारा तीन महिला पत्रकारों को प्रताड़ित किया गया।

आईजेयू ने अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही एक महिला पत्रकार द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत पर कड़ा संज्ञान लिया है। शिकायत के अनुसार, ड्यूटी के दौरान एक एसीपी रैंक के अधिकारी द्वारा कथित तौर पर महिला पत्रकार से छेड़छाड़ (molested and groped) की गई।

यूनियन ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि पीड़िता के निरंतर प्रयासों के बावजूद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के पुलिसकर्मियों ने कई घंटों तक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने से इनकार कर दिया। आईजेयू का मानना है कि इस प्रकार की जानबूझकर की गई देरी और निष्क्रियता दोषी अधिकारियों को बचाने का खुला प्रयास दर्शाती है, जो कानून के शासन से चलने वाले लोकतांत्रिक समाज में कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता।

बयान में आगे कहा गया कि मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों के साथ-साथ स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ीं कई महिला पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को शारीरिक आक्रामकता, डराने-धमकाने और प्रदर्शनकारियों के साथ मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने का सामना करना पड़ा। यह सब तब हुआ जब पत्रकारों ने अपने वैध प्रेस पहचान पत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रखे थे।

यूनियन ने जंतर-मंतर के आसपास सार्वजनिक पटल पर वैधानिक आदेश जारी किए बिना मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को मनमाने ढंग से बंद किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। आईजेयू के अनुसार, इस प्रकार तदर्थ रूप से इंटरनेट बंद किए जाने से मौके से की जाने वाली स्पॉट रिपोर्टिंग बुरी तरह बाधित होती है, जनता के सूचना के मौलिक अधिकार का हनन होता है और पत्रकारों को ज़मीनी हकीकत की रिपोर्टिंग करने से रोका जाता है।

आईजेयू की प्रमुख मांगेंः इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन ने सरकार और प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
त्वरित कार्रवाई: आरोपी पुलिस अधिकारी तथा संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक और विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए।
समयबद्ध स्वतंत्र जांच: प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ हुई शारीरिक आक्रामकता, उत्पीड़न और गैरकानूनी हिरासत की एक समयबद्ध व स्वतंत्र जांच कराई जाए।
स्पष्ट दिशा-निर्देश: केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी स्पष्ट निर्देश जारी करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पत्रकार किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान बिना किसी हिंसा, उत्पीड़न या गैरकानूनी हिरासत के भय के अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
सभी प्रभावित मीडियाकर्मियों के साथ अपनी अटूट एकजुटता दोहराते हुए आईजेयू ने स्पष्ट किया कि देश की राजधानी के केंद्र में प्रेस की आवाज़ दबाने और पत्रकारों को डराने-धमकाने के किसी भी प्रयास का पूरे देश में कड़ा विरोध किया जाएगा।

पी सी रथ
छत्तीसगढ़ में आई जे यू से जुड़े संगठन “स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ ” ने भी इस घटना का कड़ा विरोध किया है तथा प्रदेश अध्यक्ष पी सी रथ ने देश की राजधानी में पत्रकारों पर हमलों को लोकतंत्र पर हमला निरूपित किया है।

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