- प्रदेश श्रम सचिव सोनमणि बोरा के विशेष प्रयासों से आखिरकार सुखमति को देर रात हस्पताल में भर्ती करके चिकित्सा सुविधा मिली, अवनीश शरण कवर्धा कलेक्टर भी सक्रीय रहे
रायपुर 26 अप्रेल 2020 ( इंडिया न्यूज रूम ) छत्तीसगढ़ की सुखमति के पीलिया से गंभीर रूप से ग्रसित होने की खबर जब गुडगाव से तस्वीर सहित छत्तीसगढ़ पहुंची, तो संवेदनशील पत्रकारों और सामजिक कार्यकर्ताओं ने अपने संपर्कों को गुडगाँव हरयाणा में खंगालना शुरू कर दिया. दरअसल वहां छत्तीसगढ़ के 24 श्रमिकों का एक दल फंसा हुआ था. जिसमे एक महिला श्रमिक के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर मिली. संपर्क करके ढाढ़स बंधाया गया, राज्य के श्रम विभाग को सूचित किया गया, मरीज को एम्बुलेंस बुला कर सरकारी हस्पताल में तुरंत जाने को कहा गया.
गुडगाँव के सिविल हस्पताल में प्रारंभिक परिक्षण के बाद वापस जाने को कह दिया गया था, किन्तु प्रदेश के श्रम सचिव सोनमणि बोरा तथा कवर्धा कलेक्टर अवनीश शरण के विशेष प्रयासों से आखिरकार सुुुखमति को देर रात हस्पताल में भर्ती करके चिकित्सा की शुरुआत हो गयी.
मजदूरों की इस दूसरे चरण के लाकडाउन में घर वापसी कब होगी ? ये सवाल तो लगातार गर्म है ही साथ में अपने आधे पेट राशन के ऊपर महीने भर काट रहे पहले से कुपोषित गरीब मजदूरों में बीमारियों से खुद का बचाव करने और इलाज कराने की चुनौतियां भी अब सामने आने लगी है.
दूसरी तरफ सारे देश में चिकित्सा सेवाएँ तथा हस्पताल कोरेना वायरस के इलाज के लिए तैयार किये जाने के कारण अन्य बीमारियों के लिए मरीजों को बड़ी परेशानी हो रही है, सुखमति को भी गुडगाँव सिविल हस्पताल से 4 गोलियां लिख कर वापस कर दिया गया था. बाद में श्रम सचिव सोनमणि बोरा के विशेष प्रयास के कारण ही बाद में उनकी पीलिया से गंभीर रूप से ग्रसित होने को ध्यान में रखते हुए देर रात उन्हें हस्पताल में दाखिल किया गया. इन प्रयासों में बिलासपुर की सामाजिक कार्यकर्त्ता प्रियंका शुक्ला और दंतेवाडा की मधु ने भी विशेष समन्वय किया, दिल्ली में प्रदेश के अधिकारियों ने भी रूचि ली और जिम्मेदारी से काम करके छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदेश के श्रमिकों के लिए सरकार की जवाबदेही को निबाहा.



