मास्क पहनने में भी कोताही बरत रहे लोग
जांजगीर-चांपा। प्रधानमंत्री ने 3 माई तक लॉक डाउन की घोषणा कर दी है। साथ ही सोशल डिस्टेसिंग बनाकर रहने की सलाह भी दी गई है। ताकि इस खतरनाक जानलेवा महामारी से बचा जा सके। इससे यहां लॉक डाउन का असर धीरे-धीरे बेअसर होता दिख रहा है। क्योंकि शासन सुस्त हो गया है और लोग बेपरवाह हो गए है। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में यह लॉकडाउन पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। हल्की शहर में पुलिसिया धमक होने के कारण लोग इसका मजबूरीवश पालन कर रहे है।
वहीं ग्रामीण इलाकों में इसका तनीक भी असर नहीं दिखाई दे रहा है। आम दिनों की तरह लोग एकसाथ जुट कर बात कर रहे है। घंटों तफरी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो पूरा आम दिनों की तरह ही जिदगी चल रही है। यू कहें कि प्रधानमंत्री के लॉकडाउन की घोषणा का खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। कभी कभार पुलिस व राजस्व अधिकारियों की वाहन गांव के गलियों में गुजरता हैं तो सायरन की आवाज सुनकर सभी भाग खड़े हो जाते हैं। बाद में सभी एकजुट होकर बैठ जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान अनेक दुकानों को छूट दे दी गई है। कई स्थानों पर गरीबों, आमलोग व कहीं-कहीं फंसे लोगों के लिए खाना खिलाने की व्यवस्था कर नेक कार्य किया जा रहा है। उसमें भी कोरोना वायरस से बचाव के सारे नियम व निर्धारित मानक को तोड़ कर धज्जियां उड़ाई जा रही है। कई फल व सब्जी दुकान पर काफी भीड़ देखी जा रही है। लॉक डाउन का असर जिले में बेअसर होता दिखाई दे रहा है। लोग लॉकडाउन को मजाक के रूप में ले रहे है। साथ ही कोरोना वायरस जैसे खतरनाक संक्रमण को हल्के में ले रहे है।
शासन ने रोज की जरूरत वाली आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए दोपहर सुबह 9 बजे से 4 बजे तक किराना दुकानें खोलने व लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करते हुए सामान खरीदने की छूट दी है। पर बिर्रा फाटक के आस पास सवेरे से साम तक लोगो की चहल पहल देखी जा सकती है। यहां देख कर कोई यह नहीं कह सकता है कि देश में लॉक डाउन चल रहा है। बाजार से पुलिस नाम का संगठन बैठता तो है पर उन्हें भी इसमें किसी प्रकार का सरोकार नहीं है वह सिर्फ अपनी ड्यूटी बजा रहे है। जिसके चलते लोग बहाना बनाकर बाजार मे घुमते हुए आसानी से देखे जा सकते है।



