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छत्तीसगढ़ से शानी ने कथा लेखन में राष्ट्रीय फलक पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई – कैलाश बनवासी

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शानी जी के जन्मदिवस पर जनवादी लेखक संघ का भव्य कार्यक्रम

पोस्टर प्रदर्शनी, कथा-उपन्यास विमर्श और काव्यपाठ से सजा साहित्यिक माहौल, दो किताबों का विमोचन भी

रायपुर, 16 मई 2026 — साहित्यकार जनाब गुलशेर खां ‘शानी’ जी के जन्मदिन के अवसर पर जनवादी लेखक संघ (जलेस) छत्तीसगढ़ तथा शानी फाउंडेशन द्वारा आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ के कथा-उपन्यास पर विमर्श तथा मीडिया से जुड़े कवियों के काव्यपाठ का कार्यक्रम रायपुर में संपन्न हुआ। प्रदेश भर के रचनाकारों ने बड़ी संख्या में शिरकत की।कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ कथाकार एवं जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर पांडे ने किया। उन्होंने कहा, “जब देश में पहुंच मार्ग की दृष्टि से बस्तर एक दूरस्थ एवं विषम स्थान माना जाता था, तब शानी जी वहां बैठकर न केवल आदिवासी जनजीवन को सूक्ष्मता से देख रहे थे, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समाज के जीवन-संघर्ष को अपनी रचनाओं में उकेर रहे थे। उनकी कृतियाँ ‘कस्तूरी’ और ‘कालाजल’ जैसी रचनाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की।”कथाकार कैलाश बनवासी ने कहा, “देश के यशस्वी लेखकों-कवियों जैसे राजेंद्र यादव, असगर वजाहत के साथ शानी जी की तस्वीरें एक तरह से इतिहास को जीवित कर देती हैं। छत्तीसगढ़ से शानी जी ने कथा लेखन में राष्ट्रीय फलक पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।”

प्रथम सत्र (कथा-उपन्यास विमर्श):
आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए जलेस प्रदेश सचिव पी.सी. रथ ने शानी जी के योगदान को याद किया और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लेखन परंपरा का जिक्र करते हुए माधवराव सप्रे तथा पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी को श्रद्धांजलि दी।आधार वक्तव्य देते हुए कैलाश बनवासी ने गजानंद माधव मुक्तिबोध जी का स्मरण किया, जिन्होंने 1954-55 में छत्तीसगढ़ अंचल में रहकर लेखन किया और श्रीकांत वर्मा, शानी जी, प्रभात त्रिपाठी, विनोद कुमार शुक्ला सहित अनेक लेखकों को प्रभावित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के प्रमुख कथाकारों की सूची भी प्रस्तुत की।सत्र की अध्यक्षता करते हुए कामेश्वर पांडे ने हिंदी गद्य की छत्तीसगढ़ी परंपरा, सत्यदेव दुबे, हबीब तनवीर, मुक्तिबोध के ‘विपात्र’ तथा लोचनप्रसाद पाण्डेय के लेखन पर विस्तार से चर्चा की। सत्र के अंत में जलेस राज्य उपाध्यक्ष नंदन ने आभार व्यक्त किया।दूसरे सत्र में काव्यपाठ:

 


मीडिया से जुड़े कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। नंदकुमार कंसारी ने “फूल कांस की थाली”, निकष परमार ने “उन्होंने मैना को बचाने उसे पिंजड़े में कैद कर लिया” एवं “बस्तर से लौट कर” जैसी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। राजकुमार सोनी, देवेंद्र गोस्वामी, भागीरथ प्रसाद वर्मा, पी.सी. रथ तथा मुमताज ने भी अपनी कविताएं सुनाईं। इस सत्र का संचालन भास्कर चौधरी ने किया। आयोजन में डॉ त्रिपाठी, रूपेंद्र राज, शेखर नाग, संजय शाम, श्री तिवारी एवं अन्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
किताबों का विमोचन:
कार्यक्रम में कांकेर के वरिष्ठ कवि इस्माईल जगदलपुरी के काव्य संग्रह “बंद गली की टूटती सांसों की आखिरी ग़ज़लें” तथा कामेश्वर पांडे के लघु उपन्यास “लीलागर” का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में जलेस प्रदेश उपाध्यक्ष भास्कर चौधरी ने देश में मजदूरों के न्यूनतम वेतन और 8 घंटे काम के अधिकार के आंदोलनों पर सरकार द्वारा दमन की निंदा की तथा लखनऊ से बुद्धिजीवी व पत्रकार सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी की भी निंदा की।

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