महासमुन्द। रेंजर मोहनदास मानिकपुरी से मोबाइल से संपर्क कर सलाम छत्तीसगढ़ की प्रतिनिधि ने सवाल किया कि असम की हल्ला बोल टीम क्यों नहीं बुलायी जाती तो उन्होंने बताया कि अक्टूबर से 5 सदस्यीय टीम हैं। असम के हल्ला बोल दल के 5 सदस्यीय टीम की भूमिका प्रशँसनीय रही। इनके कारण आज व हमेशा से हाथियों के झुंड को कुशलता से नियंत्रित कर जंगल तक पहुंचा पा रहे हैं। आज एक बार फिर से एक भयावह हादसा टला। असम की हल्ला बोल 5 सदस्यीय टीम की निपुणता के कारण ही हाथियों का झुंड शहर के अंदर नहीं घुसा, बल्कि गांव के बाहर से ही जंगली क्षेत्र की चली गई। लेकिन अभी भी हाथी महासमुंद से बागबाहरा जाने वाले मार्ग पर कंपार्टमेंट नंबर 65/66 के पास, वाइल्ड लाइफ डैम के आसपास डेरा डाले हुए हैं। जनसुरक्षा के लिहाज से वन विभाग की 3 टीमें गठित कर तीन अलग अलग क्षेत्रों में भेजी गई है ताकि ग्रामीणों को नियंत्रित किया जा सके और वाइल्ड लाइफ डैम एरिया के आसपास लोगों को जाने से रोका जा सके। रेंजर और असम की 5 सदस्यीय टीम ने सलाम छत्तीसगढ़ एससीजी न्यूज़ के जरिए भी अपील किया कि लोग हाथियों को जबरन ना छेड़े। हल्ला ना करें, भीड़ के रूप में एकत्रित ना हो, बिल्कुल दूर हट जाये। रेंजर श्री मानिकपुरी ने कहा कि हाथी अपने मार्ग में मानव हस्तक्षेप पसन्द नहीं करते। आज वो वृद्धा बाल बाल बची। खेत में गोबर बिनती हुए वह अनजान थी कि अचानक हाथी पहुंच गए, और उसने अपनी सूंड़ से वृद्धा को एक तरफ हटाया भर था। यही वजह थी कि वृद्धा को हल्की चोट आई। वन विभाग, पुलिस और असम की टीम पूरी चौकसी में हैं। हाथी दानापानी, चारा व हरियाली की तलाश में भटक रहे।
गौरतलब है कि सिरपुर हाथी प्रभावित क्षेत्र के 53 गाँव में हाथियों का उत्पात तो था ही अब इनका भी दायरा बढ़ता चला गया है। भोजन पानी की तलाश में ये 3 भाग में तो कभी 2 भाग में बँटकर बालोद बाज़ार, रायपुर और महासमुंद के रिहायशी इलाकों में घुस अा रहे, साथ ही खेतों में विचरण कर फसलों को भी बर्बाद कर रहे। विगत 3 दिनों में 23 हाथियों का दल गरियाबन्द से विचरण करते हुए महासमुंद पहुंच गया है। विशेषज्ञ बता रहे कि फसल इस वर्ष अच्छी हुई हैं, अतः यह हरियाली देख कर खूब चल रहे और चर भी रहे। मुड़मार बांध के ऊपर अभी भी हाथी के चिंगघाड़ने का आवाज थोड़ी थोड़ी देर में सुनाई दे रही है।



