रायपुर। जिला कलेक्टोरेट में इन दिनों रोजाना मिल रहे सैकड़ों आवेदन से अधिकारी भी सकते में आ गए हैं कि इनमें से किन आवेदनों पर जिले से बाहर जाने की अनुमति दी जाए और किन आवेदनों पर नहीं। आवेदनों में बाहर निकलने के कारण भी ऐसे-ऐसे आ रहे हैं कि अधिकारी भी सोचने पर मजबूर हो गए हैं।
जिला कलेक्टोरेट में इन दिनों आवेदन करने वालों की बाढ़ सी आ गई है। रायपुर जिले से प्रदेश के अन्य जिलों में जाने के लिए लोग बड़ी संख्या में आवेदन करने पहुंच रहे हैं। इसके अलावा ई-पास की सुविधा भी जारी की जा चुकी है। ई-पास के माध्यम से भी रोजाना हजारों की संख्या में आवेदन प्राप्त हो रहा है। अब अधिकारियों की मुश्किल यह है कि इन आवेदनों में से किन लोगोंं को बाहर जाने की अनुमति दी जाए और किसे नहीं। क्योंकि आवेदन में बाहर निकलने के जो कारण दर्शाए जा रहे हैं वह चौंकाने वाले हैं। इसी तरह ई-पास के लिए ऑनलाइन मिल रहे आवेदनों पर भी विचार करना अब अधिकारियों के लिए मुश्किल साबित होने लगा है। रोजाना हजारों की संख्या में आने वाले आवेदनों को पढ़ पाना और उचित आवेदन पर तत्काल कार्यवाही करते हुए उन्हें ऑनलाइन ही पास जारी करना मुश्किल हो रहा है। कलेक्टोरेट में पदस्थ सूत्रों ने बताया कि ऑफ लाइन और ऑनलाइन मिल रहे आवेदनों की संख्या रोजाना सैकड़ों में हैं। सीमित समय में इन आवेदनों को गंभीरता से पढऩा और इस पर तत्काल एक्शन लेना किसी के भी बस की बात नहीं है। राजधानी होने के कारण यहां प्रदेश के कोने-कोने से लोग आकर रहते हैं और काम करते हैं।
करीब डेढ़ माह के लंबे लॉकडाउन में अधिकांशजन किसी भी तरह से अपने घर और परिजनों तक पहुंचना चाहते हैं, यह स्वाभाविक सी बात है कि यहां रहने वाले व्यक्ति के परिवारवाले भी उन्हें अपने पास बुलाना चाहते हैं। आवेदनों में इन्हीं कारणों को प्रमुखता से दर्शाया जा रहा है। एक आवेदन में पत्नी के गर्भवती होने तथा डिलवरी का समय नजदीक होने का कारण दर्शाते हुए एक आवेदनकर्ता ने जिला कोरिया जाने की अनुमति मांगी है। इसी तरह एक आवेदनकर्ता के बुजुर्ग पिता की तबियत ज्यादा खराब होने तथा उसके बिलासपुर में भर्ती होने पर उचित उपचार कराने के लिए बिलासपुर जाने की अनुमति मांगी गई है। कुछ आवेदनकर्ताओं ने माता-पिता की देखरेख करने और अन्य कारणों का हवाला देकर अन्य जिलों में जाने की अनुमति मांगी है। अब अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इनमें से कितने आवेदनों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए अनुमति दी जाए और किन आवेदनों को निरस्त किया जाए। ऊपर से अधिकारियों का यह भी दबाव है कि जिले से बाहर जाने और आने वाले लोगों की संख्या बेहद सीमित हो और आपातकाल और अंत्यंत आवश्यक कार्य होने पर ही अनुमति दी जाए। इसमें निकटतम परिजनों के गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने, मृत्यु होने जैसे बड़े कारणों पर तत्काल अनुमति दिए जाने का प्रावधान किया गया है।



