Home छत्तीसगढ़ क्या अयाज तम्बोली के आने पर सुधर पायेगा हाउसिंग बोर्ड ?

क्या अयाज तम्बोली के आने पर सुधर पायेगा हाउसिंग बोर्ड ?

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  • भ्रष्ट अधिकारियों की मंडली ने सीए और भ्रष्टों को दे रखा है संरक्षण, 15 सालों से जमे अधिकारी ही सर्वे-सर्वा
  • आज तक हाउसिंग बोर्ड में करोड़ों के घोटाले के बाद भी नहीं हुई रिकवरी
  • कमिशनखोरी के लिए नियम विरुद्ध सीए की बार-बार की जा रही नियुक्ति

रायपुर। हाउसिंग बोर्ड के जांच अधिकारी एमडी पनेरिया के व्दारा भ्रष्ट अधिकारी पीके सोनवानी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने के नाम नूरा कुश्ती का खेल खेला जा रहा है। यानी जो दिख रहा है वह जांच के नाम पर कार्रवाई नहीं बल्कि बचाने के नाम पर कार्रवाई है। यहां हर्रा लगे न फिटकिरी और रंग जोखा होने का जांच नाटक किया जा रहा है। जांच अधिकारी पनेरिया ने ही पीके सोनवानी को जांच घोटाले की फाइलों की जगह अच्छे रिकार्ड वाली फाइल को जांच में प्रस्तुत करने जिम्मा सौंप दिया है। जांच अधिकारी पनेरिया भी सोनवानी को बचाने के लिए मनमाने ढंग से सभी जांच की फ ाइलें कॉपी कर पीके सोनवानी को दे दी है। इस तरीके की खबर हाउसिंग बोर्ड के हलकों से आ रही है। भ्रष्ट अधिकारी पीके सोनवानी को जल्द से जल्द भ्रष्टचार से मुक्त कर बड़े अधिकारी उसके काले कारनामे पर सफेदी की चादर ओढ़ाकर पूरे सम्मान के साथ निलंबन रद्द कर वापसी की तैयारी करवा रहे हैं। ऐसी नूरा कुश्ती किसी भी विभाग में नहीं देखी होगी, सिर्फ हाउसिंग बोर्ड में भ्रष्ट ही जांच अधिकारी और भ्रष्ट ही आरोपी होते है, दोनों बाइज्जत बच जाते है और हाउसिंग बोर्ड करोड़ों का कर्जदार बन जाता है।

सीए की नियुक्ति का प्रावधान नहीं, फिर भी 15 सालों से दे रहे फीस

हाउसिंग बोर्ड के नियम के अनुसार किसी भी स्तर में सीए की नियुक्ति किए जाने का प्रावधान नहीं है । लेखा अधिकारी के अंतर्गत इंटरनल ऑडिट अधिकारी की परमानेंट नियुक्ति होती है । हाउसिंग बोर्ड जब से बना है उसे इंटरनल ऑडिट और ऑडिटर हाउसिंग बोर्ड में नियुक्त है लेकिन इंटरनल ऑडिटर से ऑडिट ना करवाकर सीए को अपॉइंटमेंट कर अनाप-शनाप फ ीस देकर हाउसिंग बोर्ड चारों खाने चित करने का कारनामा हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है । सीए जो नियुक्त होता है उससे पहले अनाप-शनाप में काम कराया जाता है फि र मनमाना काम कराया जाता है। और जब सीए लगता है जिस काम के लिए उसकी नियुक्ति हुई है उसके जगह अनाप-शनाप काम कराया जा रहा है। सीए नियुक्ति नहीं करने की जगह एडिशनल काम के तौर पर सीए रखने की हाउसिंग बोर्ड में परंपरा बनी हुई है ।

जैसे सीए किसी अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप अपने आडिट नेोट में करता हौै तो आब्जरवेशन पाइंट को जांच उपरांत तत्काल समंबंधित अधिकारी से उक्त अनियमितताएं और राशि वसूलने के अलावा विभागीय कार्रवाई का प्रावाधन है। तब भ्रष्ट अधिकारी उसके बड़े अधिकारी मनमाने ढंग से पैसा वसूलते हैं, और अपना पैसा वसूलने के लिए लगातार हाउसिंग बोर्ड को टारगेट बनाकर नए तरीके के काले कारनामे को सफेदी का चादर ओढ़ा दिया जाता है। इसी तरह की नूरा कुश्ती हर साल बजट से लेकर आडिट तक खेला जाता है। इस दौरान भ्रष्ट अधिकारी को पाक साफ होने बड़े अधिकारी सफाई फीस करोड़ों में लेते है और सीए की कार्यकुशलता से भ्रष्टाचार को मिसलेनियश बताकर जांच की फाइल बंद कर दी जाती है और अधिकारी को निलंबित करने की जगह प्रमोशन दे दिया जाता है। सीए का कार्यकाल जैसे ही खत्म होता है उसी समय भ्रष्ट अधिकारी को सीए व्दारा उस वक्त की गई गंभीर भ्रष्टाचार और आब्जरवेशन में पकड़ में आए अनियमितता को आधार बना कर भ्रष्ट अधिकारी को ब्लैकमेल करता है और अपनी नियुक्ति फिर से एक वर्ष के लिए करा लेता है। इसी तरह भ्रष्ट अधिकारियों का भी प्रमोशन होते रहता है।

हाउसिंग बोर्ड का लेखा नियम क्या बोलता है 

अब सवाल यह उठता है हाउसिंग बोर्ड का लेखा नियम क्या बोलता है लेखा नियम के अंतर्गत अगर सीएनए आपत्ति उठाई ऑडिट में और ऑब्जरवेशन के लिए पन्ने खोले हैं उस पर कार्रवाई करना अति आवश्यक है ऑडिट के अनुसार संबंधित अधिकारी को लेखा नियम के अंतर्गत सजा देने का प्रावधान है। लेकिन आज तक कई बार सीएजी ने भ्रष्ट अधिकारियों बहुत सारे आपत्ति, बहुत सारे ऑडिट ऑब्जरवेशन निकाले, लेकिन किसी पर भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई। न ही पैसे की वसूली हुई । हाउसिंग बोर्ड को करोड़ों की चप्पत सीए और अधिकारी मिलकर लगाते रहे है, हाउसिंग बोर्ड में सीए आडिटर होने के बावजूद बाहर से सीए रखने की परंपरा विगत 15 सालों से चालू की गई है । ज्ञात रहे कि पिछली सरकार के समय सीएजी ने भी घोर भ्रष्टाचार और अनियमितता ऑडिट ऑपरेशन के माध्यम से लगाए थे, लेकिन भाजपा सरकार के दलाल किस्म के अधिकारी जो विगत 15 सालों से अभी तक हाउसिंग बोर्ड में दीमक की तरह चट करने में लगे हुए हैं, उन्होंने इस पर आज तक किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होने दी । अगर कानूनी कार्रवाई होती और पैसे की वसूली की कार्रवाई शुरू होती तो इन अधिकारियों को भी जेल के पीछे जाना पड़ सकता है। जो आज विभागीय कोताही की वजह से आलीशान बंगलों में और रहते है और इंपोरटेंट कार में घूमते है और हवाई सफर कर रहे है।

रिकवरी को लेकर मेरे समक्ष कोई मामला नहीं आया

सीएजी की रिपोर्ट में हाउसिंग बोर्ड के क्रियाकलाप, अनियमितताओं के बारे में आई आपत्ति पर विधानसभा में उठाए जाने के बाद संबंधित पक्ष को प्रश्न का जबाव दिया गया था, जिस पर सरकार ने क्या कार्रवाई की इसकी मुझे जानकारी नहीं है। घोटाले में अधिकारियों से रिकवरी को लेकर भी कोई मामला मेरे समक्ष नहीं आया है, यदि मेरे संज्ञान में लाया जाता है तो उस पर जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।

-भीमसिंह, हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर

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