याचिकाकर्ता ने कहा- विधि विभाग के मैनुअल को दरिकनार कर अफसरों की मदद
रायपुर:- संविधान लागू होने के बाद संभवत: पहली बार किसी महाधिवक्ता के खिलाफ अवमानना का मामला सामने आया है। रायपुर निवासी कुंदर सिंह पिता हरि सिंह ठाकुर ने पिछले दिनों हाईकोर्ट में याचिका दायर कर महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा, एएजी विवेक रंजन तिवारी, डीएजी मतीन सिद्धिकी, डीएजी रवि भगत, डीआरओ चमेली चंद्राकर, आईएएस अफसर विवेक ढांड, एमके राउत और सुनील कुजुर के खिलाफ कंटेंम्ट केस क्रिमिनल दायर किया है।
कुंदन सिंह ने अपने याचिका में कहा है कि एक हजार करोड़ के कथित घोटाले के मामले में कोर्ट के आदेश बाद महाधिवक्ता ने विधि विभाग की बिना जानकारी के रिव्यू पीटिशन दायर किया। उन्होंने विभागीय मैनुअल का भी पालन नहीं किया। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी बताया है कि 31 जनवरी 2020 के दिन महाधिवक्ता के ऑफिस का किस तरह से इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उस दिन विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर के साथ तमाम अफसरों का हाईकोर्ट परिसर में दाखिल होना हाई प्रोफाइल रहस्यमय कानूनी ड्रामा जैसा था। याचिकाकर्ता का कहना है कि रिव्यू पिटीशन पर वही बेंच सुनवाई कर सकती है, जिसने आदेश दिया हो। लेकिन संबंधित बेंच की अनुपस्थिति की जानकारी होते हुए भी रिव्यू पिटीशन दायर किया गया। हालांकि सुनवाई नहीं हो सकी।
जानिए क्या है पूरा मामला
समाज कल्याण विभाग से संबंधित राज्य स्रोत निशक्त जन संस्थान माना रायपुर के नाम पर 1000 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप है। इसको लेकर रायपुर के रहने वाले कुंदन सिंह ठाकुर ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर जनहित याचिका की थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद केस की जांच सीबीआई को सौंप दी। मामले में विवेक ढांड, एनके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय, पंकज वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के सार्वजनिक होते ही अफसरों में हड़कंप मचा। सभी अफसर कानूनी सलाह और हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे। यहां उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय में महाधिवक्ता कक्ष में बैठकर अपने-अपने अधिवक्ताओं से चर्चा की।



