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समर्थन मूल्य के नाम पर मोदी सरकार ने किसानों को एक बार फिर छला : रविन्द्र चौबे

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छग के कृषि मंत्री ने भाजपा नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार पर साधा निशाना

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने आज केन्द्र की मोदी सरकार पर किसाना विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। श्री चौबे ने आज राजधानी रायपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की भाजपा सरकार ने नए खरीफ वर्ष के लिए धान के समर्थन मूल्य को बढ़ाने के नाम पर किसानों को एक बार फिर छलने का काम किया है। श्री चौबे ने कहा कि केन्द्र द्वारा कल घोषित समर्थन मूल्य पांच वर्ष में सबसे कम है। इसके साथ ही यह वर्तमान में बढ़ी हुई महंगाई से भी कम है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में धान का लागत मूल्य ग़लत ढंग से निकाला है और उनके द्वारा इसे डेढ़ गुना मूल्य बताया जा रहा है।

श्री चौबे ने कहा कि इसके लिए मोदी सरकार को देश के किसानों से माफी मांगनी चाहिए। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने धान का समर्थन मूल्य वैसे तो 53 रुपए बढ़ाया है लेकिन अगर प्रतिशत में देखें तो पिछले साल की तुलना में यह समर्थन मूल्य सिफऱ् 2.92 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने कल चार तथाकथित बड़ी घोषणाएं की हैं, जो झूठ का पुलिंदा है। मोदी सरकार ने जिन 14 फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया है उनमें दो को छोड़कर सब पांच प्रतिशत या उससे से कम है। धान और अन्य फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि तो बाज़ार में बढ़ी महंगाई की दर से भी कम है। दूसरी घोषणा यह है कि किसानों को 7 प्रतिशत की दर पर कजऱ् दिया जाएगा. सच यह है कि यह पुरानी योजना है।

तीसरी घोषणा समय पर कजऱ् चुकाने पर तीन प्रतिशत सब्सिडी देने की है, इसका सच भी यह है कि यह छूट पहले से मिलती आ रही है। चौथी घोषणा यह है कि किसानों के लिए ब्याज़ में छूट 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है, सच यह है कि किसानों को ब्याज़ से छूट नहीं है बल्कि पटाने के समय में छूट मिली है। श्री चौबे ने कहा कि ऐसे समय में जब किसान दबाव और तनाव में है मोदी सरकार ने किसानों का भला करने के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठाए हैं। उन्होने कहा कि 20 जून, 2018 को नमो ऐप पर किसानों से बातचीत करते हुए खुद मोदी जी ने ‘लागत+50 प्रतिशतÓ का आंकलन सी-2 के आधार पर देने का वादा किया था। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि फ सल की लागत मूल्य में किसान के मज़दूरी व परिश्रम + बीज + खाद + मशीन + सिंचाई + ज़मीन का किराया आदि शामिल किया जाएगा। लेकिन उनकी सरकार ने लागत का आंकलन करते हुए इस फार्मूलेे को दरकिनार कर दिया। श्री चौबे ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार कह रही है कि धान की प्रति क्विंटल लागत 1245 रुपए है जबकि अगर इसमें सारे खर्च जोड़ दिए जाएं तो किसी भी सूरत में धान की लागत इससे बहुत अधिक पड़ती है।

यानी मोदी जी का किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आज फिर से जुमला बन गया। श्री चौबे ने कहा कि भाजपा की अटल बिहारी बाजपेई सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 6 वर्षो में 490 रू. से 550 रू. किया था। यानी मात्र 60 रू. की वृद्धि की थी। अब मोदी सरकार ने शुरुआत के चार वर्षो में मात्र 200 रु.की वृद्धि की थी. चूंकि 2018-19 चुनावी साल था तो उस साल 200 रू. की वृद्धि इस वर्ष सिर्फ 53 रू. प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। जबकि कांग्रेस ने 10 वर्षो में समर्थन मूल्य में 890 रू. की वृद्धि की थी। यूपीए-1 में धान का समर्थन मूल्य 5 वर्षों में 2004 से 2009 तक 450 रूपए बढ़ाया गया। और धान का मूल्य 550 रू. प्रति क्ंिवटल से 900 रू. प्रति क्ंिवटल हो गया था। यूपीए-2 में 2009 से 2014 तक 5 वर्षों में धान का समर्थन मूल्य 440 रूपए बढ़ाया गया। श्री चौबे ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने अपने 6 साल के अब तक के कार्यकाल में धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने के नाम पर किसानों के साथ केवल छल करने का ही काम किया है। पत्रकारवार्ता में कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी, प्रदेश उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन और प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला भी उपस्थित थे।

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