रायपुर। भाजपा नेता यह क्यों भूल जाते हैं कि भाजपा के ही शासनकाल में गौरक्षा के नाम पर करोड़ों का घोटाला हुआ, गौशालाओं में गायों की हत्या की गई, उनके मांस के साथ ही हड्डियों का व्यापार किया गया था। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने भाजपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा नेता अजय चंद्राकर को आज इस बात की तकलीफ है कि भूपेश सरकार क्यों गाय और गोबर को सम्मान देने की बात कर रही है। इस बात को भुलाया नहीं जा सकता कि परंपरा और संस्कृति की बात करने वाले अजय चंद्राकर, अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में ठहाके लगाते दिखाई दिये थे।
यह सच है कि भारतीय जनता पार्टी ने गौरक्षा के नाम पर प्रदेश भर में गौशालाएं बनवाईं और 15 साल के रमन सिंह सरकार में उनको करोड़ों रुपए का अनुदान भाजपा नेताओं की गौशालाओं को सरकार की ओर से मिलता रहा। लेकिन अंतत: भाजपा के नेता गौ सेवा करने वाले नहीं गौमाता को मारकर चमड़े, हड्डी और मांस का व्यापार करने वाले निकले। ऐसा एक से अधिक जगहों पर हुआ। ऐसी पार्टी के नेता अजय चंद्राकर आज अगर प्रदेश के राजकीय चिन्ह का अपमान करने वाले ट्विट कर रहे हैं और यदि उन्हें गोबर से गंध आ रही है तो यह उनकी और उनकी पार्टी भाजपा की नीति और नीयत का मामला है।
आज भाजपा नेता अजय चंद्राकर को तकलीफ इस बात की हो रही है कि भूपेश बघेल की सरकार नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी कार्यक्रम के तहत गाय को सम्मान दे रही है और अब गोधन न्याय योजना से गोबर खरीदने जा रही है। दरअसल भाजपा गाय को वोट देने वाली प्राणी के रुप में देखती आई है और दरअसल उसके मन में गाय के प्रति सम्मान का भाव है ही नहीं। अजय चंद्राकर गाय और गोबर का अपमान करने वाले पहले नेता नहीं है। इससे पहले भाजपा के कथित ‘वीरÓ यानी विनायक दामोदर सावरकर भी गाय और गोबर के बारे में बेहद अपमानजनक बातें कह चुके हैं। अजय चंद्राकर ने भाजपा और संघ की पाठशालाओं में गाय और गोबर का अपमान ही सीखा है।
अजय चंद्राकर पर पलटवार करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि अजय चंद्राकर जी की टिप्पणी सीधे-सीधे हिन्दू धर्म का, भारतीय परंपरा का और छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान का अपमान है। गोबर को तो बहुत पवित्र माना जाता है। भारत में, हिन्दू धर्म में पंचगव्य में गोबर को सम्मिलित किया गया है। गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन खुंदाने के बाद गोबर से माथे पर तिलक करते है।



