रायपुर:- छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव डेयरी एसोसिएशन (सीजीपीडीएफ) ने एक बयान जारी कर सरकार से छोटी एवं मझोले डेयरियों द्वारा उत्पादित वर्मी कंपोस्ट की तरह खरीद करने की मांग की है. सीजीपीडीएफए ने कहा है कि जिस तरह सरकार ने गौठानों की बनी वर्मीकंपोस्ट को खरीदने का फैसला किया है, उसी तरह प्रदेश की छोटी डेयरियों में उत्पादित वर्मी कंपोस्ट को सरकार को खरीदना चाहिए क्योंकि इन डेयरियों में भी वर्मी कंपोस्ट उत्पादन इकाईयां सरकार ने लगवाई थीं.
संस्था के पुरुषोत्तम यदु और धीरेंद्र कश्यप ने कहा है कि प्रदेश में छोटे-छोटे डेयरियों में वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन से उनकी जो थोड़ी बहुत आय होती है,अगर सरकार ने उसे बचे रहने की व्यवस्था नहीं की तो उनकी माली हालत बिगड़ जाएगी. ये पशुपालक पहले से ही लॉक डाऊन से भारी नुकसान उठा रहे हैं.
2015 मे छत्तीसगढ़ सरकार ने नाबार्ड के सहयोग से डेयरी उद्यमिता स्कीम शुरु की थी. जो भाजपा शासनकाल तक चली. इस योजना में प्रदेश में हज़ारों डेयरियां खुलीं. सैकड़ों घाटे के बाद बंद हो गई. डेयरी में अतरिक्त आमदनी हेतु एक कंपोनेंट वर्मी कंपोस्ट उत्पादन था. चार साल में धीरे-धीरे कई डेयरियों ने वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन शुरु किया और इसे बाज़ार में खपाने लगे.
छ्त्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव डेयरी फॉर्मर्स असोसिएशन का कहना है कि सरकार ने जिन डेयरी व्यावसाइयों को खड़ा किया. जिनकी गौशाला में वर्मी कंपोस्ट का प्लांट लगवाया, उनसे वर्मी कंपोस्ट खरीदे. अगर पशुपालक वर्मी कंपोस्ट नहीं बनाता है तो गोबर की खरीदी करे. ये कर्ज में डूबे उन पशुपालकों के लिए बड़ी राहत होगी.
धीरेंद्र कश्यप
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