Home बिलासपुर संभाग कोरबा सिंघाली भूमिगत कोयला खदान का ऊपरी हिस्सा एकाएक धंसा

सिंघाली भूमिगत कोयला खदान का ऊपरी हिस्सा एकाएक धंसा

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ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज होने के कारण भी ऐसी घटनाएं होती है-प्रबंधन

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की सिंघाली भूमिगत कोयला खदान के अंतर्गत एक स्थान में जमीन का चार मीटर हिस्सा धंस गया। जहां यह हुआ, वह बंजर जमीन है। सुबह लोगों ने इस स्थिति को देखा। प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। सुरक्षा की दृष्टिगत प्रभावित हिस्से को बारवेट वायर से घेरा जा रहा है। निगरानी के बाद यहां भराव संबंधी काम कराया जाएगा।

कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल के कोरबा क्षेत्र में सिंघाली परियोजना कार्यशील है। 1993 से यह अस्तित्व में आयी। पिछले 27 वर्षों से यहां कोयला खनन संबंधी कामकाज चल रहा है। भूमिगत कोयला परियोजनाओं में होने वाली गतिविधियों और खासतौर पर वर्षाकाल में भूमिगत जलस्त्रोत के रिचार्ज होने के कारण कई मौकों पर प्राकृतिक घटनाएं होते रहती है, जिनमें जमीन में गहरे और चौड़े गड्ढे हो जाना शामिल है। ऐसा ही कुछ सिंघाली कोयला खदान के क्षेत्र में हुआ। पिछली रात यह घटना हुई। इसके समय को लेकर निश्चित जानकारी किसी को नहीं है। सिंघाली गांव के काफी लोग निस्तार के लिए आसपास में जाया करते हैं। घटना स्थल भी इसी हिस्से में शामिल है, जहां लोगों की आवाजाही काफी समय से होती रही।

बताया गया कि आज सुबह ग्रामीण निस्तार के लिए जा रहे थे। सिंघाली खदान से कुछ ही दूर गांव की बस्ती है और उसी से बगल में गौठान भूमि बनी हुई है जिसके पास का मैदान अचानक धस गया, इस मामले में आक्रोशित गांव के लोगों का कहना है जोरदार विस्फोट की आवाज सुनाई दी बाद में लोगों के द्वारा जाकर देखने पर पता चला मैदान वाले भूमि 12 बाय 12 जिसका मुहाना तथा 25 से 30 फीट गहरा भूमिगत हो गई है। यह गाय की चरने का स्थान भी है। लोगों में काफी आक्रोशित है। तब उन्होंने एक स्थान पर संरचना में बदलाव देखा। पास जाने पर पता चला कि वहां काफी बड़े आकार का गड्ढा है। जमीन धंसने जैसी स्थिति यहां पर मौजूद थी। इसे देख लोग सक्ते में आए।
उन्होंने इस बारे में ग्रामीणों और अन्य संबंधितों को जानकारी दी। कुछ ही देर में यहां लोगों की भीड़ लग गई। जनसमूह कौतूहल के साथ यहां जमा रहा। एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच स्थिति जानी और इसका अध्ययन किया। प्रशासन को इस संबंध में फौरी तौर पर अवगत करा दिया गया है। इससे पहले भी कई मौके पूर्व में आये है जबकि खदान से काफी दूर आम निस्तार वाली जगहों में इस तरह के गड्ढे विशेषकर वर्षाकाल में हुए है। कुछ वर्ष पूर्व ग्राम सुराकछार में भी इसी तरह भू धंसान की घटना हुई थी जिसकी वजह भूमिगत खदान में कोयला खोदने के बाद रिक्त स्थान पर डीपिलरिंग में लापरवाही की बातें सामने आई थी। यह मुदा आज भी यथावत है। फिलहाल ढेलवाडीह सिंघाली मैदान में भू धंसान की खबर पर एस ई सी एल के अधिकारी व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी मौका पर पहुंचे।

इन घटनाओं को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है, जबकि प्रबंधन ने इनसे जुड़े कारणों को स्पष्ट किया है। एस ई सी एल कोरबा क्षेत्र के सी जी एम एन. के. सिंह बताया कि सिंघाली अण्डर ग्राउंड माईंस के आसपास निस्तारी जमीन में चार मीटर का गड्ढा होने की खबर है। इसके अस्सी मीटर नीचे खदान का क्षेत्र है। फाल्ट लाईन जहां से गुजरती है, वहां इस तरह के वाक्ये काफी न्यून स्थिति में होते है। ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज होने के कारण भी ऐसी घटनाएं होती है। बारिश के दौर में इस तरह का ओकेशनल फिनामिना कभी कभार होता है। फिर भी सुरक्षा को लेकर संबंधित क्षेत्र की फेंसिंग कराई जा रही है। जमीन धंसने वाली जगह की निगरानी की जायेगी की उसका आकार बढ़ रहा है या यथावत है। इस आधार पर एक दिन के बाद वहां भराव कराया जायेगा।

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