सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2011से सहायक आरक्षको बने SPO को वर्षों से उत्कृष्ट कार्य करने बाद भी विभागीय आरक्षक जैसी सुविधाएं व सम्मान न मिलना सरकार की बड़ी चूक
जगदलपुर । बस्तर में 2005 में माओवादियों के खिलाफ तात्कालिक राज्य सरकार के द्वारा संचालित सलवा जुडूम जनजागरण अभियान में बस्तर के विभिन जिलों के माओवादी प्रभावित गांवों के हजारों युवाओं ने लोकतंत्र व भारत के संविधान व राज्य सरकारों के वादों पर भरोसा करके खुद को इन जनजागरण अभियान का हिस्सा बनाया साथ ही खुद को स्थानीय स्तर पर फोर्स के आगे रख कई अभियानों में सफलता भी दिलाई, उस समय की तात्कालिक सरकार ने इस तरह के युवाओं को SPO (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) के नाम पर भर्ती करवा न्यूनतम वेतन पर कार्य करवाया ,इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका में वर्ष 2011 में आये फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमोदन ने राज्य की जनजातीय सलाहकार समिति के माध्यम से प्रस्ताव बनवा राज्य सरकार द्वारा राज्य गृह मंत्रालय के माध्यम से इन्हें SPO के पद से सहायक आरक्षक के रूप में नियुक्त किया गया । इस पद जरूरत के हिसाब से 9 महीने की बुनियादी प्रशिक्षण देकर सी आईएटी, सिटीजेडब्लू तथा अन्य राज्यो में भेज कमांडो व गोरिल्ला वार ट्रेनिंग दिलवाया गया व जिला पुलिस बल,सीआरपीएफ, आईटीबीबी,एसटीएफ व समस्त बस्तर में तैनात केंद्रीय फोर्स के साथ ड्यूटी में तैनात रखा गया, फिर भी आज तक इन युवा सहायक आरक्षको को केंद्रीय व राज्य स्तरीय आरक्षक पद पर न तो पदौन्नत किया गया न ही उस पद को मिलने वाली तमाम सरकारी लाभ व सुविधा मिले। इन मांगों को लेकर बस्तर के सहायक आरक्षको के परिवार ने बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के समक्ष उनकी जायज मांगों को सरकार तक पहुचाने का निवेदन किया है। बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा के सयोजक नवनीत चाँद ने केंद्र व राज्य सरकारो व गृहमंत्रालय की नीतियों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जब सरकार बस्तर में माओवादियों के खिलाफ लड़ने हेतु जरूरत थी तो जो युवा इन विचारों के खिलाफ सरकार की ताकत बनने हेतु खुद को समर्पित कर हर मोर्चे पर तैनात हो बस्तर में लोकतंत्र को मजबूत रखने हेतु कार्य करते है, तो उनकी जायज मांग सरकार क्यो पूरा नही करती? उनकी मांग समान काम -समान अधिकार का ही है। वही कोरोना कॉल में जो जवान ड्यूटी करने संक्रमण से ग्रसित हो रहे है। उन्हें स्पेशल मेडिकल छुटी न दे उनके मेडिकल छुटी से काटा जा रहा है। न ही कोरोना वारियर्स की तरह बीमा किया गया है। जबकि सरकार ने इन मुद्दों पर बार बार घोषणा की है। इन सभी संवेदनशील विषयो पर बस्तर अधिकार मुक्तिमोर्चा केंद्रीय गृह मंत्रालय ,राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री व गृह सचिव के नाम बस्तर आईजी को ज्ञापन सौप रहा है।



