नई दिल्ली। राफेल डील मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. देश की शीर्ष अदालत ने केंद्र की विशिष्ठ एवं गोपनीय दस्तावेजों पर केंद्र के विशेषाधिकार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि दस्तावेज अदालत में मान्य हैं.
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई की पीठ ने केंद्र की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई योज्यता के आधार पर की जाएगी और इसके लिए नई तारीख का ऐलान बाद में होगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 14 दिसंबर 2018 को कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दिए गए दस्तावेजों पर उसका विशेषाधिकार है.सरकार ने कहा था कि इन दस्तावेजों पर कोर्ट संज्ञान न ले. पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, पूर्व भाजपा नेता अरुण शौरी और सामाजिक कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका को सरकार ने खारिज करने की मांग की थी. केंद्र ने कोर्ट से कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है उनको याचिका से हटा देना चाहिए. सरकार का कहना है कि जिन मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी अनाधिकृत रूप से तैयार की गई थी जिसकी जांच की जा रही है. पूरे मामले पर बीजेपी ने कहा कि लोग इसे झटके की तरह देख रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र की जो याचिका ख़ारिज हुई है इसे झटके के रूप में न देखा जाए.



