रायपुर। 40 दिन पहले वीआईपी रोड पर एक्सीडेंट में जान गंवाने वाली 21 साल की श्रेष्ठा के माता पिता इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। युवती श्रेष्ठा की मौत को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है लेकिन कई बार मांगने के बाद भी न तो उनको घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं और न ही पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट। यहां तक की कार से टक्कर मारने वाली महिला शिखा अग्रवाल पर हिट एंड रन का केस ही दर्ज किया गया है। रायपुर में प्रेस कांन्फ्रेंस में बेटी के मौत के कारणों की जानकारी देते हुए पिता आभास सतपथी ने न्याय की मांग की.
पुलिस द्वारा सही कार्यवाही न किये जाने का मुख्य कारण बताया जा रहा है शिखा अग्रवाल राज्य प्रशासनिक सेवा के उस अफसर की पत्नी हैं जो वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी हैं। शिखा अफसर की पत्नी थीं तो छात्रा को टक्कर मारकर घर चलीं आईं। कुछ देर बार पुलिस ने खानापूर्ति कर आधे घंटे में ही उन्हे थाने से जमानत दे दी।इस 10 सितंबर को श्रेष्ठा का जन्मदिन था और अपनी बेटी के जन्मदिन पर चॉकलेट बांटते के बदले वे उसकी मौत पर इंसाफ के लिए भटक रहे हैं।
इंसाफ के लिए भटक रहे माता पिता –
21 साल के श्रेष्ठा के पिता SBI में AGM आभास सतपथी की आंखे डबडबाई हुई हैं, वे रुंधे गले से कह रहे हैं कि श्रेष्ठा उनकी 21 साल की उम्मीद थी एक पल में उम्मीद ही खत्म हो गई। अपनी बेटी की तस्वीर लिए माता, पिता और दो भाई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आज 10 सितंबर को उनकी बेटी का जन्मदिन था।
जन्मदिन आने से पहले ही श्रेष्ठा इस दुनिया से चली गई। वे इंसाफ के लिए दर दर भटक रहे हैं। वे कहते हैँ तेलीबांधा पुलिस के जांच अधिकारी से बार-बार गुहार लगाई गई फिर भी उनको पोस्ट मार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई। जिस तरह से एक्सीडेंट करने वाले को जमानत दी गई और गाड़ी को छोड़ा गया इससे बहुत बड़ा संदेह पैदा हो रहा है। जांच को प्रभावित किया जा रहा है।
अफसर की पत्नी ने ले ली जान –
श्रेष्ठा की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई। श्रेष्ठा 1 अगस्त को अपने पिता के लिए दवा लेने स्कूटी से निकली थी। तभी एरिना होटल के पास रांग साइड से आती हुई एमजी हेक्टर SUV कार ने उसको टक्कर मार दी। कार का नंबर CG-14-MP -0686 था। ये कार शिखा अग्रवाल चला रहीं थी। शिखा अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी संयुक्त कलेक्टर तीर्थराज अग्रवाल की पत्नी हैं।
प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार कार चालक शिखा टक्कर मारकर वहां से भाग गईं। शिखा अफसर की पत्नी थीं इसलिए पुलिस ने घर से गाड़ी ले ली और मेडम को आधे घंटे में थाने से जमानत देकर घर भेज दिया गया। पुलिस ने उन पर बीएनएस 106/1 धारा लगा दी। लेकिन मेडम के खिलाफ हिट एंड रन का केस नहीं बनाया। उनकी एक लापरवाही से पढ़ाई में तेज नीट की परीक्षा पास कर एमबीबीएस में एडमिशन लेने की तैयारी कर रही श्रेष्ठा की जान चली गई। यदि टक्कर मारने वाली महिला शिखा अग्रवाल जख़्मी श्रेष्ठा को घटना स्थल से सीधे हस्पताल ले जाती तो संभवतः श्रेष्ठा की जान बच जाती.
अफसर की पत्नी पर हिट एंड रन क्यों नहीं?
श्रेष्ठा की मां मधु कहतीं हैं कि नीट में अच्छी रैंक से पास हुई श्रेष्ठा के माता पिता इस बार उसका जन्मदिन अच्छे से मनाने की तैयारी कर रहे थे। इस जन्मदिन को उसके नीट में चयन के सेलीब्रेशन के रुप में भी मनाया जाना था। लेकिन इससे पहले ही श्रेष्ठा इस दुनिया से चली गई। अफसोस की बात ये भी है कि श्रेष्ठा के माता पिता को न तो एक्सीडेंट वाली जगह के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज दिखाए गए और न ही उनको पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट मिली है। पीड़ित माता पिता की मांग है कि उनको ये सारे तथ्य उपलब्ध कराए जाएं और शिखा अग्रवाल पर हिट एंड रन का केस दर्ज हो।महिला अफसर की पत्नी इसलिए हो रही कोताही –
पीड़ित माता पिता कहते हैँ कि टक्कर मारने वाली महिला बड़े अफसर और राजनीतिक ताल्लुकात वाली है इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। वे सभी बड़े अफसरों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है। पुलिस कहती है कि शिखा अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
हैरानी की बात ये भी है शिखा अग्रवाल पर जुलाई 2024 में रायपुर में ही डेंजरस ड्राइविंग के लिए 2 हजार की पेनाल्टी लगाई गई थी। फिर भी पुलिस इस मामले को जिसमें एक युवा लड़की की मौत होती है इतने हल्के में ले रही है। पिता की मांग है कि इस मामले की सीआईडी जांच कराई जाए और निष्पक्ष तरीके से कार्यवाही हो तभी उनको इंसाफ मिल पाएगा। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि यह घटना उस रायपुर शहर की है जहाँ के उत्तर रायपुर के भाजपा विधायक, जगन्नाथ मंदिर के पुरन्दर मिश्र भी उसी समुदाय से आते हैं जिस समुदाय के आभास सतपथी की युवा बेटी की इस असामयिक मौत के बाद न्याय के लिए उसके माँ बाप को इतना संघर्ष करना पड़ रहा है.
2 महीने पहले पुणे में पोर्श कार से एक रसूख वाले नाबालिग ने दो युवा इंजिनियरों को तेज गति से कुचल दिया था और उसे थाने से छोड़ दिया फिर पब्लिक विरोध के कारण जुवेनेल कोर्ट ने निबंध लिखने का दंड दें कर छोड़ा, इस मामले में नेता प्रतिपक्ष को आवाज़ उठानी पड़ी तब सही कार्यवाही हुई, ऐसा ही कुछ इस प्रकरण में रायपुर में हुआ.
किसी हँसते खेलते परिवार को अपनी युवा पुत्री को किसी अधिकारी की पत्नी के ग़लत ड्राइविंग की आदतों के कारण खो देने का दुःख तो है ही, किन्तु इस घटना के अपराधी को प्रदेश की राजधानी में तमाम सुरक्षा, सी सी टीवी कैमरों तथा प्रत्यक्ष दर्शियों के बयानों के बाद बाद भी पुलिस द्वारा एकतरफा बचाया जाता है, तो दुःख होता है. घटना की सही मीडिया रिपोर्ट के बावजूद कमजोर धाराएँ लगा कर मंत्री और अधिकारी के प्रभाव के कारण एक घटना के आरोपी को इस तरह बचाया जाना कितना दुःखद है. प्रदेश की राजधानी में दिन दहाड़े इस तरह का कृत्य कितना जायज है जहाँ मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा समूची सरकार बैठी है.
इसी तरह की घटनायें अमीर और प्रभावशाली लोगों के द्वारा देश भर में गैरकानूनी रूप से की जा रही हैं जिससे सामान्य लोगों की जान खतरे में आती जा रही है. देश में क़ानून सबके लिए बराबर हैं, अगर श्रेष्ठा की तरह आम नागरिकों को इस तरह सड़क पर कुचल कर मारा जायेगा और क़ानून कुचलने वालों के पक्ष में खड़ा रहेगा तो हम आप के परिजनों का क्या होगा? हम आप अपनी ड्यूटी में व्यस्त रहते हैं आपके परिजन, बच्चे इसी सड़क, इसी समाज में अपना मुवमेंट करते हैं, इस तरह का हादसा कहीं भी किसी के भी साथ हो सकता है. जिन लोगों को क़ानून का भय, कार्यवाही का भय नहीं होगा वे कभी भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे कर साफ़ बच जाएंगे.
मीडिया के जरिये आम जनता तक ये सच्चाई पहुंचनी चाहिए जिससे ऐसे अपराधियों पर उचित और सही कानूनी कार्यवाही का दबाव बनाया जा सके.



