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अमलीडीह नवीन महाविद्यालय में महिला दिवस संगोष्ठी

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रायपुर, महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न संस्थानों में परीक्षाओं के बाद समय निकाल कर कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में शासकीय नवीन महाविद्यालय अमलीडीह रायपुर में आयोजित संगोष्ठी में प्राचार्या डॉ. अनीता सरीन ने छात्रों से महिला दिवस की महत्ता पर बात करते हुए गौरैया दिवस पर भी बात की। एक चिड़िया का चहकना बहुत जरूरी है हमें गर्मी से भी इन्हें बचाना है।

डॉ प्रीता लाल, प्रोफेसर इकोनॉमिक्स ने महिला दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।
यामिनी साहू ने गौरैया दिवस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि गौरैया आज दिखाई नहीं देती, प्रदूषण भी इसका एक कारण है और भीषण गर्मी भी। हमें गौरैया को बचाने के लिए कृत्रिम घोंसलों को भी बनाकर रखना होगा।
डॉ तनुजा बघेल ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने और कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालन की जिम्मेदारी हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष नम्रता ध्रुव ने निभाई।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में शासकीय नवीन महाविद्यालय अमलीडीह के छात्रों के साथ एक सफल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कॉलेज के व्याख्याताओं ने भी भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रों से चर्चा की गई कि महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? क्या हम सभी इस बारे में जानते हैं। इस बातचीत में गौरैया दिवस के संदर्भ को जोड़ते हुए यह भी बात की गई कि जिस तरह गौरैया विलुप्त हो रही हैं क्या महिलाएं भी विलुप्त हो रही हैं इसलिए महिला दिवस मनाया जा रहा है?

छात्रों ने इस बात पर कहा कि समाज में बराबरी हो , महिलाओं के सम्मान को बढ़ाना है। इस मुद्दे पर संक्षिप्त बातचीत के बाद प्रश्नोत्तरी को दिखाकर हर स्लाइड पर भी बात की गई। सभी अपने शब्दों में उत्तर बता रहे थे ,कहीं कहीं छात्र स्वयं इस बात से भी प्रसन्नता महसूस कर रहे थे कि उनके द्वारा दिए गए जवाब सही भी आ रहे थे। Quiz में दिए कुछ सवालों पर विस्तार से चर्चा की गई जैसे- 1960 में दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने में एक लंबा समय लगा, लिंग अनुपात कम होने के कारण, महिलाओं के लिए कानून के प्रावधान के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? आदि, इन सवालों के माध्यम से चर्चा की गई। जेंडर विभेद तोड़ने के वीडियो दिखाते हुए सभी ने महिला इलेक्ट्रिशियन के द्वारा प्लग, होल्डर, तार को फिट करने के कार्यों पर अपनी राय दी कि अब इस तरह के कार्य भी महिलाएं करने लगी हैं। एसिड अटैक पर छात्राओं ने छपाक फिल्म को जोड़कर भी बात रखी। ऋचा रथ तथा प्रीति ने इस तरह के आयोजन में युवाओं की अधिकतम भागीदारी पर जोर दिया।

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