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आज दंतेवाडा में उपचुनाव मतदान  – सत्ता की प्रतिष्ठा के साथ  सहानुभूति की जंग

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रायपुर.  दंतेवाड़ा उपचुनाव का शोरगुल अब थम चुका है. आज 23 सितंबर को इस सीट पर वोटिंग होनी है. दंतेश्वरी माई की भूमि में सबके अपने अपने तीर चल चुके हैं अब निशाना किसका सच्चा लगा ये देखने के लिए 27 तारीख का इन्तजार है . पुरानी सहानुभूति  लहर वर्सेस नई सहानुभूति लहर की यह ‘जंग’ कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी की प्रतिष्ठा और साख का सवाल बन गई है. पिछले चुनाव के दौरान बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों में से एक मात्र दंतेवाड़ा ही वो सीट है, जो बीजेपी के खाते में आई थी। मगर विधायक भीमा मंडावी की हत्या के बाद वहां फिर एक बार चुनाव होने जा रहे हैं.

दंतेवाड़ा के इस उपचुनाव को सिंपैथी पॉलिटिक्स के रूप में ही देखा जा रहा है. जहां दोनों ही प्रत्याशियों का दर्द कहीं न कहीं एक ही है. दोनों ने ही अपनों को नक्सलियों के कारण खोया है। जहां झीरम हमले में मारे गए दिवंगत नेता महेन्द्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा मैदान में है. तो वहीं बीजेपी ने भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मण्डावी को मैदान में उतारा है.

दंतेवाड़ा उपचुनाव में सिंपैथी फैक्टर बीजेपी और कांग्रेस, दोनों तरफ काम कर रहा है. अब ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि आखिर दंतेवाड़ा विधानसभा के मतदाताओं को कौन सा फैक्टर प्रभावित करेगा. मगर बस्तर की एक मात्र सीट को बचाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है. विधानसभा की हार के बाद दिग्गजों की भी प्रतिष्ठा इसी सीट से जुड़ी हुई है.

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी बीजेपी मुक्त बस्तर का लक्ष्य लेकर चल रही है. सहानभूति की लहर को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि दिवंगत महेन्द्र कर्मा की छवि अब भी लोगों के दिलों में बसी हुई है. इसके अलावा बीते 8 महीनों में सरकार ने जो काम किया है वो मतदाताओं पर असर डालेगा . हालांकि आज  23 सितंबर को दंतेवाड़ा में  प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा. वहीं 27 सितंबर को यह तस्वीर भी साफ होगी कि इस सीट पर सत्ता रूढ़ कांग्रेस का दम-खम टिकेगा या बीजेपी दंतेवाड़ा सीट के रूप में बस्तर में बचा पाएगी अपनी साख. उल्लेखनीय है कि बस्तर की ही रिक्त सीट चित्रकोट में भी चुनाव की घोषणा हो चुकी है और माना जा रहा है कि दंतेवाड़ा के नतीजे वहां के मतदाताओं में मिजाज पर जरुर असर डाल सकते हैं.

 

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