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बीजापुर जिले में 5 ग्रामीणों की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, लूट की भी शिकायत

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बीजापुर. 31 दिसंबर 2019. माओवादियों से मुठभेड़ के बाद विस्फोटक सहित 5 माओवादियों को गिरफ्तार करने का पुलिस ने किया था दावा जबकि परिजनों का आरोप गिरफ्तार किए गए लोग नहीं हैं माओवादी. ग्रामीणों का आरोप सुरक्षाबल के जवानों ने निर्दोष आदिवासियों के साथ किया मारपीठ। जवानों पर 15000 रुपये भी चुराने का लगा रहे आरोप तथा मुठभेड़ को भी फर्जी बता रहे हैं. विधायक से मिल कर न्याय की गुहार लगाने सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे. जहाँ पत्रकारों के अलावा विधायक और राज्यमंत्री विक्रम मंडावी भी ग्रामीणों की शिकायतें सुन रहे है.

गंगालूर थाना क्षेत्र के पीडिया गांव से सुरक्षाबल के जवानों ने 5 लोगों को किया है गिरफ्तार. जिले के गोटपल्ली पहाड़ में सोमवार को माओवादियों से मुठभेड़ के बाद विस्फोटक सहित 5 माओवादियों को गिरफ्तार करने का पुलिस ने किया था दावा. अब गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजन और ग्रामीण पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा रहे हैं. इसके साथ ही जवानों पर 15 हजार स्र्पये लूटने का भी आरोप ग्रामीणों ने लगाया है.
फोटो में जो आदिवासी महिलायें दिखाई दे रही हैं गोद में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर मातायें सर्दी में खुले मैदान में 4 दिन से पड़ी हुई है.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की यह वह मातायें हैं जिनके बच्चों के पिता अथवा किसी माता के बेटे को पुलिस नक्सलवादी कहकर घरों से और खेतों से पकड़ कर ले गई है दूसरी फोटो में दिख रहे इन आदिवासियों को पुलिस ने 26 तारीख को घर से उठाया था कानून कहता है कि 24 घंटे के अंदर पकड़े गए व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाना चाहिए . यह महिलाएं 4 दिन से अपने परिवार के सदस्यों को ढूंढ रही है जब सोनी सोरी को पता चला और उन्होंने स्थानीय पत्रकारों को सूचित किया
स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी और कहा कि कल यह आदिवासी सड़क पर मार्च करेंगे तब आनन-फानन में घबराकर पुलिस ने आज शाम को एक प्रेस रिलीज जारी करी जिसमें कहा गया कि पकड़े गए यह लोग माओवादी हैं और उन्हें कोर्ट में पेश कर दिया गया है पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में इन आदिवासियों के पकड़े जाने की कोई तारीख नहीं लिखी गई है
यह आदिवासी अपनी स्वतंत्रता जीविका और मानव अधिकारों को गंवा कर चुका रहे हैं. पुलिस का यह रास्ता ना तो शांति की ओर ले जाएगा और ना ही इससे लोकतंत्र मजबूत होगा
इस संबंध में गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजनों ने मंगलवार को स्थानीय विधायक से मुलाकात की और मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की. परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग माओवादी नहीं हैं. उनका कहना है कि सुरक्षा बल निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों को गलत आरोपों में फंसा रहे हैं. सैकड़ों की तादात में गंगालूर थाना क्षेत्र के पीड़िया गांव के लोगों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर विधायक विक्रम मंडावी से मुलाकात की और न्याय की गुहार लगाई. सोमवार को पीड़िया गांव से लगे गोटपल्ली पहाड़ में माओवादियों के साथ मुठभेड़ और पांच माओवादियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी बीजापुर पुलिस द्वारा दी गई थी.
इस दौरान पुलिस पार्टी ने विष्फोटक सामग्री और नक्सलियों के सामान भी बरामद करने का दावा किया था. गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम भीमा लेकाम (25 वर्ष) साकिन पटेलपारा अंडरी थाना गंगालूर, राजू ओयाम (35 वर्ष) ग्राम पीडिया, लेकाम पारा, भीमा बाड़से (23 वर्ष) ग्राम मददुम थाना गंगालूर, सोमलू ओयाम (45 वर्ष) साकिन पीड़िया ओयाम पारा और शांति कलमू (25 वर्ष) साकिन मददूम थाना गंगालूर बताए गए थे. यहाँ बस्तर में चल रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान अक्सर पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ों के आरोप लगते रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर से नक्सली, तो दूसरी ओर से पुलिस और सुरक्षा बल लगातार उन पर दबाव बना रहे हैं. आदिवासी ग्रामीणों का आरोप है कि नक्सल उन्मूलन अभियान की सफलता दिखाने के लिए फर्जी मुठभेड़ का सहारा लिया जा रहा है. जिससे उन्हें पदोन्नति वगेरह में भी फायदा मिल जाता है.

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