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तीन देशों की यात्रा से लौटे युवक…. सैंपल देने के लिए चार घंटे भटकना पड़ा

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रायपुर। देश में कोरोना वायरस संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने के बाद सतर्कता बरती जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी दावे कर रही है, लेकिन तीन देशों की यात्रा कर लौटे भिलाई के एक युवक की दास्तान ने इंतजाम के दावों की पोल खोल दी है। उक्त यात्री की न तो मुंबई एयरपार्ट पर स्कैनिंग की गई और न ही रायपुर में कोई मदद मिल पाई।

चार घंटे भटकने के बाद सैंपल तो लिया गया लेकिन किसी आइसोलेशन वार्ड में रखने की जरूरत महसूस नहीं की गई। जागरुकता और अन्य लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए युवक ने खुद को अपने घर के कमरे में कैद कर लिया है। जानिए भुगतभोगी की जुबानी, सैंपल देने के लिए चार घंटे भटकते रहने की दास्तान….

मैं केन्या, इथोपिया, दुबई होते हुए मुंबई पहुंचा। एयरपोर्ट पर कोरोना वायरस के लिए यात्रियों में तनाव साफ महसूस कर रहा था। मुंबई पहुंचते ही सभी यात्री एयरपोर्ट प्रबंधन को अपनी जानकारी देकर रवाना हो गए। मैंने मुंबई के डोमेस्टिक एयरपोर्ट से रायपुर के लिए उड़ान भरी। मुझे गले में खराब और खांसी आ रही है। सहमा हूं। दोपहर 12:15 बजे रायपुर माना एयरपोर्ट पहुंचने के बाद अपनी सुरक्षा की दृष्टि जांच के लिए एयरपोर्ट हेल्प डेस्क को पूछते हुए वहां तक पहुंचा। देखा कि कोई भी कर्मचारी डेस्क पर मौजूद नहीं था।

किसी तरह की जानकारी नहीं मिलने पर मैं एयरपोर्ट के बाहर आ गया, तब जाते-जाते गार्ड से बात की। उसने मुझे एयरपोर्ट मैनेजर के दफ्तर में भेजा। एयरपोर्ट मैनेजर को जानकारी जैसे ही दी, उन्होंने महिला मेडिकल ऑफिसर और डॉक्टर को बुलाया। इसके बाद मेरी पूरी जानकारी लेकर मुझसे पूछने लगे-आप क्या चाहते हैं। मैंने स्वास्थ्यगत समस्या को बताते हुए खुद का जांच सैंपल देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने जांच सैंपल के लिए मुझे डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल जाने की सलाह दी। टैक्सी लेकर मैं रायपुर अस्पताल के लिए रवाना हो गया।

अस्पताल में भी दो घंटे तक भटका

दोपहर 2:30 से तीन बजे के बीच आंबेडकर अस्पताल पहुंचा। परिसर के बाहर ही कोरोना वायरस को लेकर हेल्प डेस्क बनी हुई थी। जानकारी लेने जब मैं वहां पहुंचा तो हेल्प डेस्क पर एक भी ऐसा कर्मचारी नहीं मिला जो मुझे कुछ बता सके। हां, वहां मे-आइ-हेल्प-यू की जगह पर 25 से 30 सफाई कर्मी अटेंडेंस लगाने बैठे हुए थे। उनके हो-हल्ला के बीच सवाल करने पर किसी ने कुछ नहीं बताया।

जानकारी लेने के लिए मैं अंदर कर्मचारियों के पास पहुंचा। इधर-उधर भटकने के बाद भी किसी तरह की जानकारी नहीं मिल पाई थी, तभी एक कर्मचारी ने मुझे पहली मंजिल पर भेजा। वहां से कुछ देर बाद थर्ड फ्लोर पर जाने की सलाह दी गई। जांच कक्ष तक पहुंते तक लगभग डेढ़ से दो घंटे अस्पताल में ही गुजर चुके थे। चिकित्सक अने मेरी जांच कर सैंपल लिया। इसके बाद कुछ नहीं बोले। कुछ देर इंतजार किया फिर घर चला आया।

सैंपल रिपोर्ट तक खुद को रखूंगा कैद

सैंपल की जांच रिपोर्ट आने तक खुद को घर के कमरे में ही कैद रखूंगा ताकि यदि संक्रमण है तो हमसे दूसरा कोई प्रभावित न हो। जिस तरह मैं भटका हूं, स्वास्थ्य मंत्री से यही अपील करूंगा कि प्रदेश में संक्रामक बीमारियों के बचाव के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त करें, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित रखा जा सके।

डॉक्टर ने कहा- सभी का सैंपल लेना जस्र्री नहीं

वहीं, अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. रविंद्र कुमार पांडा ने कहा कि ऐसा जस्र्री नहीं है कि विदेश से आने वाले यह व्यक्ति का सैंपल लिया जाए या जांच की जाए। जिन लोगों के सर्दी-खांसी के लक्षण दिखेगा, उन्हीं का सैंपल लिया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। भविष्य में इसका ध्यान रखा जाएगा। सिंहदेव ने यह भी बताया कि नागपुर के लैब से संबंधित व्यक्ति की रिपोर्ट आ गई है, जो निगेटिव है।

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