रायपुर:- छ ग में हाकर्स जान की बाजी लगा कर पेपर बांट रहे हैं उन्हें न सेनेटाइजर की बोतल दी गयी है न रोजाना उपयोग के लिये मास्क के बंडल , वे मज़बूरी में पेपर बांट रहे हैं जबकि उन्हें भी अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए इस लॉक डाउन में अपने अपने घरों में रहना चाहिए। प्रशासन की यह गैरजिम्मेदार और गरीब हाकर्स जो सामान्यतः कम उम्र के बच्चे और युवा होते है उसके प्रति लापरवाही है।
खुले में कई किलोमीटर तक बिना मास्क और सुरक्षा के फेफड़े पर जोर डाल कर सायकल चलाने , और अलग अलग घरों में पेपर डालने के कारण उनके इस वायरस संक्रमण के समय में संक्रमित होने का खतरा है। पेपर बांटने वाले के पास न तो सेनेटाइजर होता है न ही बार बार हाथ धोने की व्यवस्था न ही इसके लिये समय।पेपर बांटने वाले को यदि वायरस केरियर के रूप में इस्तेमाल करता है तो इससे भी संक्रमण फैल सकता है क्योंकि किसी भी हाकर्स का मेडिकल परीक्षण या इलाज मीडिया समूह द्वारा कभी कराया गया हो ऐसा इतिहास में कहीं दर्ज नही है, इसके कारण जब तक लॉक डाउन है पेपर बांटना भी बंद होना चाहिए। लखनऊ , उदयपुर, चंडीगढ़ जैसे देश के कई भागों में हाकर्स समाचारपत्र बांटने से इनकार कर चुके हैं।
छत्तीसगढ़ में भी एजेंट , सब एजेंट्स, हाकर्स के स्वास्थ्य की चिंता की जानी चाहिए।



