- मध्य वर्ग को होमलोन, कारलोन, ब्याज, ऋ ण भुगतान में भारी राहत
- ईएमआई भरने-कर्ज लौटाने में भी मिल सकती है तीन महीने की छूट
- रेपो रेट में ऐतिहासिक कमी रिवर्स रेपो रेट भी घटाया
- अर्थव्यवस्था को एक और बूस्टर डोज
नई दिल्ली। कोरोना के कारण खड़ी हुई बड़ी चुनौतियों से पार पाने के लिए मोदी सरकार ने 24 घंटे के अंदर अर्थव्यवस्था को दूसरा बूस्टर डोज दिया है। बृहस्पतिवार को 80 करोड़ गरीब-मध्य वर्ग को राहत देने के लिए 1.70 लाख करोड़ के विशेष पैकेज के बाद शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक में रेपो रेट में अब तक की सबसे बड़ी कटौती के साथ ही रिवर्स रेपो रेट घटा कर मध्य वर्ग को बड़ी सौगात दी है। आरबीआई केइस फैसले से खासतौर से मध्य वर्ग को होमलोन, कार लोन, विभिन्न तरह के कर्जों के ब्याज और ऋण चुकाने में बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही इस वर्ग को विभिन्न ऋणों से जुड़े ईएमआई चुकाने में भी तीन महीने की राहत मिल सकती है।
शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट में अब तक की सबसे बड़ी 75 बेसिक प्वाइंट तो रिवर्स रेपो रेट में 90 बेसिक प्वाइंट कटौती की घोषणा की। इस फैसले से रेपोरेट 5.15 फीसदी से घट कर 4.45 फीसदी तो रिवर्स रेपो रेट 4 फीसदी रह गई है। इतना ही नहीं आरबीआई गवर्नर ने सभी व्यावसायिक बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में तीन महीने की छूट देने दी है। इस फैसले से 3.74 लाख करोड़ की नकदी व्यवस्था मेंं आएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि आरबीआई से मिली छूट के बाद व्यावसायिक बैंक इसका लाभ अपने ग्राहकों को देगी। इससे होम लोन, कार लोन सहित अन्य कई तरह के लोन संबंधी ईएमआई भरने में लोगों को तीन महीने की छूट मिलेगी। इसके अलावा इस फैसले से सस्ते होम लोन के साथ होम लोन सहित विभिन्न लोन की ईएमआई में कमी का रास्ता साफ हो गया है।
और क्या बोले आरबीआई गवर्नर
-रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी। इसके कारण अचानक आर्थिक बोझ बढऩे से परेशान वर्ग को राहत मिलेगी।
– निर्धारित समय से पूर्व हुई इस घोषणा के कारण मौद्रिक नीति पर कुछ नहीं कहा गया। इस नीति से जुड़ी समिति की बैठक अगले महीने के पहले हफ्ते में होनी थी।
-सीआरआर में कटौती, रेपो रेट की दर कम होने, बैंकों को कर्ज चुकाने के लिए तीन महीने का समय दिए जाने सहित कई अन्य फैसलों के कारण व्यवस्था में 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकद धन उपलब्ध होगा।
– नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती की गई है। सीआरआर 3 फीसदी पर आ गया है। इससे वित्तीय प्रणाली में पंूजी की कमी नहीं होगी। इससे बैंकों के पास 1,37,000 करोड़ रुपये की पूंजी आएगी।
– आरबीआई की कोरोना के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों पर कड़ी नजर है। भविष्य मेंं भी वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
– अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए अगले साल के लिये आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति के बारे में मौद्रिक नीति समिति ने अनुमान नहीं जताया है।
– कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। वैश्विक मंदी की प्रबल संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
– बैंक और बैंकों में जमा धन पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इससे जुड़ी अफवाहों से बचें। न तो किसी का निवेश डूबेगा ना ही खातों में जमा रकम पर कोई समस्या आएगी।
गांव-गरीब-मजदूर-किसान के बाद मध्य वर्ग
बृहस्पतिवार को सरकार द्वारा घोषित 1.70 लाख करोड़ के विशेष पैकेज के केंद्र में गांव, गरीब, मजदूर, छोटे कर्मचारी और निम्न मध्य वर्ग था। इसमें सरकार ने गरीबों को तीन महीने मुफ्त राशन, महिला जनधनधन खाताधारियों को नकद सुविधा, किसानों को सम्मान निधि की एडवांस किश्त, छोटे कर्मचारियों के ईपीएफअंशदान भरने की जिम्मेदारी ली थी। शुक्रवार के फैसले के केंद्र में मध्य वर्ग है, जिन पर कोरोना के कारण आई मुसीबत के बावजूद अब तक कोई राहत नहीं मिल पाई थी। बहरहाल अब माना जा रहा है कि सरकार के राहत की तीसरी किश्त उद्योग जगत के लिए होगी। सूत्रों का कहना है कि इस महामारी के कारण तबाह हो रहे औद्योगिक क्षेत्र को राहत देने के लिए व्यापक विचार विमर्श जारी है।



