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कट्टरता ने कोरेना के बढ़ने में मदद की, जहाँ धार्मिक कट्टरता कम कोरेना भी नियंत्रित – नंद कश्यप

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धर्म को अलग रखकर सोशल डिस्टनसिंग का पालन करें

बिलासपुर:- एक कोरोनावायरस से दुनिया के सारे धर्म खतरे में आ गये लगता है यरूशलेम में यहूदी धर्म गुरु की बात मानकर कट्टर यहूदियों का बड़ा समूह बंद का विरोध करने सड़कों पर उतर आया नतीजा उन्हे रोकने गए मंत्री भी संक्रमित हो गया और पूरे शहर की 40% आबादी कोरोनावायरस से संक्रमित है।इसी तरह कट्टर इस्लामी लोगों को लगता है कि सोशल डिस्टेंसिंग इस्लाम को मानने वालों के खिलाफ साजिश है,उनका आरोप है कि एक ही रकाब (थाली) से राजा से लेकर रंक तक खाना खाने वाले तहजीब को इस डिस्टेंसिंग से खत्म किया जा रहा है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की खबरें आ रही है जहां कट्टर धार्मिक समूह सोशल डिस्टेंसिंग का विरोध कर रहे हैं।मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान ने तो कोरोनावायरस शब्द पर प्रतिबंध लगा दिया है और मास्क पहनना अपराध घोषित कर दिया है।

बहुत संपन्न विकसित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस योरोप भी कुछ कट्टर पंथियों के चलते भयावह संकट में फंस गया। ब्राजील में भी खुद वहां के राष्ट्रपति सोशल डिस्टेंसिंग को सख्ती से लागू करने के खिलाफ है। ये कट्टर रोमन कैथोलिक हैं।इस लिहाज से देखा जाए तो भारत का धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक लोकतंत्र दुनिया में सबसे बेहतर स्थिति में है। कुछ धार्मिक समूहों की बेवकूफियों को छोड़ दिया जाए तो हमारे देश में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन आम नागरिक इमानदारी से कर रहा है।इसी संदर्भ में यह बात बहुत स्पष्ट रहना चाहिए हरेक नागरिक के दिमाग में कि कोरोनावायरस का संकट वैश्विक और मानवीय संकट है। इसके खिलाफ सरकार और स्वास्थ्य विभाग की हरेक कारवाई नागरिकों के जान और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है,यह किसी भी धर्म या समूह के खिलाफ नहीं है। बावजूद इसके यदि कोई धर्म का हवाला देकर सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का उल्लघंन करता है तो वह सजा का पात्र है।

धर्म निरपेक्ष राज्य में धर्म आपका निजी मामला है ‌एक नागरिक को संविधान प्रदत्त सम्मान उसका अधिकार है परंतु धर्म के नाम पर उसे सार्वजनिक जीवन को खतरा पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है वरन् वह अपराध की श्रेणी में आता है।यह भी ग़लत है कि कोई अन्य धर्म द्वारा नियमों का उल्लघंन हो गया है तो दूसरे धर्म को ऐसा करने का अधिकार मिल गया। इसलिए यदि तबलीगी जमात द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग और विदेश से आए संक्रमित लोगों की पहचान स्वयं से नहीं किया जाता है तो यह तमाम नागरिकों के लिए खतरनाक है।इसे हिंदू मुस्लिम सांप्रदायिक नजरिए से नहीं वरन् देश में संक्रमण नहीं फैले और सभी नागरिक स्वस्थ रहें इस नजरिए से देखा और पेश किया जाना चाहिए।यह भी सच्चाई है कि सत्ताधारी पार्टी सांप्रदायिक है परंतु उसके खिलाफ धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता से मुकाबले की जरूरत है ना कि उन्हीं की तरह सांप्रदायिक होने की।

नंद कश्यप, बिलासपुर
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता तथा किसान नेता

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