भिलाईनगर। हैवी इण्डस्ट्रीयल एरिया हथखोज के श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री में आगजनी के चलते हुई मजदूर की मौत मामले में रोज नये-नये तथ्य सामने आ रहे हैं। लगभग 20 साल पहले बनी श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री का एक भी बार नवीनीकरण नहीं हुआ है। फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के प्रति बरती गई लापरवाही को अग्नि दुर्घटना का कारण माना जा रहा है। फैक्ट्री में आज तक श्रम कानूनों का पालन भी नहीं किया जाता। चंद श्रम अधिकारियों की शह पर फैक्ट्री का मालिक कर्मचारियों का ना ही पीएफ की सुविधा देता है और ना ही कर्मचारियों को ईएसआई की सुविधा मिलती है जबकि, कम्पनी 20 से अधिक सालों से संचालित है। श्रमिकों को पीएफ और ईएसआई का लाभ न देना आपराधिक कृत्य है जिस पर शासन प्रशासन को कड़ी कार्यवाही करने चाहिए। फैक्ट्री का मालिक कमल सेन उर्फ कमल चौहान पूर्व में फर्नेस आयल चोरी के मामले में भी जेल जा चुका है। श्रमिकों के पीएफ और ईएसआई के संबंध में जानकारी लेने के लिए फैक्ट्री संचालक को लगातार फोन किया गया किन्तु उन्होंने फोन उठाना भी उचित नहीं समझा।
फैक्ट्री में हुए आगजनी की घटना में एक गरीब मजदूर की मौत के लिए काफी हद तक फैक्ट्री का मालिक कमल सेन उर्फ कमल चौहान जिम्मेदार है। इस मामले पर विशेष गंभीरता के साथ जाँंच किया जाये तो फैक्ट्री मालिक की लापरवाही सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
बताया जाता है कि, श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री का निर्माण लगभग 20 साल पहले हुआ है। यह पुरी तरीके से हैंड मैनिफेक्चरिंग प्लांट है। बावजूद इसके फैक्ट्री मालिक ने कभी कलपुर्जों को बदलने का काम किया है और न ही समय के साथ मौजूदा परिस्थितियों के अनुरुप सुरक्षा मानकों को अपनाया है। जबकि किसी भी केमिकल फैक्ट्री में नियमत: दो से पांँच सााल के भीतर कलपुर्जों को बदलना अनिवार्य है। इसके अलावा आगजनी जैसी दुर्घटना की संभावना को देखते हुए उसके रोकथाम के लिए अग्निशमन सिस्टम, पानी की टंकी तथा फैक्टी के चारों ओर पानी की पाइप लाइन बिछाना भी जरुरी है। लेकिन श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री में ऐसी कोई भी व्यवस्था बनाने के प्रति मालिक कमल सेन उर्फ कमल चौहान ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई। आग पर काबू पाने का इंतजाम फैक्ट्री में रहता तो 28 अप्रैल को हुई दुर्घटना में मजदूरों को झुलसने से बचाया जा सकता था।
जानकारों का कहना है कि, श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री का मालिक महज दिखावे के लिए उद्योग चलाता है। जबकि उसका मुख्य धंधा फर्नेस आयल की अफरा-तफरी है। फर्नेस आयल चोरी के मामले में कमल सेन उर्फ कमल चौहान पूर्व में महासमुन्द जिले में पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। फर्नेस आयल के काले कारोबार को ढके रहने के इरादे से श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री का संचालन कमल सेन के द्वारा महज औपचारिक तौर पर किया जा रहा है। इसी वजह से फैक्ट्री के लगभग 20 साल पुराने हो जाने के बावजूद उसके जीर्णोद्धार के लिए उसके द्वारा फुटी कौड़ी तक खर्च नहीं किया गया है।
यहाँं पर यह बताना भी लाजिमी है कि, केमिकल आधारित उद्योग में पल-पल आगजनी का खतरा बना रहता है। इस खतरे को टालने फैक्ट्री के मशीनरी और कलपुर्जों की नियमित मरम्मत करनी पड़ती है। बिजली के तार व सिस्टम को भी उच्च गुणवत्ता के साथ बेहतर बनाये रखना जरुरी है। लेकिन श्री श्याम केमिकल फैक्ट्री में इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति कभी भी गंभीरता नहीं बरती गई। 28 अप्रैल को लगी आग की असली वजह इसी लापरवाही को माना जा रहा है। इस लापरवाही ने पचपेड़ी गांँव के गरीब मजदूर गोपेन्द्र की अग्नि दुर्घटना में बलि ले ली है।



