नई दिल्ली| कोरोना की इस लड़ाई के बीच आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार सुबह एक केमिकल प्लांट से जहरीली गैस का रिसाव होने लगा| जिस जहरीली गैस के रिसाव होने के कारण ऐसा हुआ है उसका नाम है स्टीरीन| विशाखापट्टनम में स्टीरीन का रिसाव हो जाने के कारण करीब 8 लोगों की मौत हो गई। इस इलाके के लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, जी मचलाना और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने की शिकायत की। इस मामले पर पीएम मोदी भी निगरानी रख रहे हैं।
बता दें कि स्टीरीन बेंजीन का यौगिक है और प्लास्टिक पेंट बनाने में यह गैस काम आती है। इस गैस के संपर्क आने से व्यक्ति के नर्वस सिस्टम पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इस गैस से करीब चार किमी तक का इलाका प्रभावित हुआ है। यह गैस, सेंट्रल नर्वस सिस्टम, गले, आंखों और शरीर के अलग-अलग भागों पर भी यह प्रभाव डालती है। यह बहुत ज्वलनशील गैस है जो जलने पर जहर बन जाती है। एक्सपर्ट की मानें तो इस गैस से प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द इलाज मिलना चाहिए। यह बहुत खतरनाक है और इस गैस के रिसाव से संपर्क में आने से मनुष्यों में त्वचा में रेशेज में आंखों में जलन, उल्टी, बेहोशी, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कहां होता है इसका इस्तेमाल
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार स्टीरीन का इस्तेमाल पॉलिस्टीरीन प्लास्टिक बनाने, फाइबर ग्लास, रबड़ बनाने में होता है। इसके अलावा पाइप बनाने, ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने, प्रिंटिग और कॉपी मशीन, टोनर, फूड कंटेनर्स, पैकेजिंग का सामान, जूतों, खिलौनों, फ्लोर वैक्स, पॉलिश में होता है। सिगरेट के धुएं और वाहनों के दुएं में भी स्टीरीन गैस होती है। वहीं ये प्राकृतिक तौर पर ये कुछ फलों सब्जियों, नट्स और मीट में भी पाई जाती है।
कम समय के लिए अगर इस गैस का रिसाव हो तो आंखों में जलन जैसे नतीजे सामने आते हैं तो वहीं लंबे समय तक गैस में रहने से यह बच्चों और बूढ़ों पर टॉक्सिक प्रभाव भी डालती है। स्टीरीन गैस से इंसानों में सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है, इसमें सिरदर्द, कमजोरी, डिप्रेशन जैसे प्रभाव देखने को मिलते हैं। बच्चों और सांस के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक है।
भोपाल गैस कांड 1984 के सबक यही थे कि कोई भी उद्योग क्या उत्पादन करता है , कितना स्टॉक किन पदार्थो का करता है ? क्या उस इलाके में होने वाले हादसों से बचाव की व्यवस्था है आपातकालीन स्थिति में किसे सूचित किया जाना है ? सारी जानकारी बोर्ड में उद्योग के बाहर होनी चाहिए , उद्योग मालिक तथा जिम्मेदार अधिकारियों का भी स्पष्ट नंबर तथा पता होना चाहिए। किन्तु खेद का विषय है कि ये आज तक पालन नही किया जा रहा है जिसके कारण ऐसे दर्दनाक हादसे होने रुक नही रहे , छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के पेपर मिल में भी क्लोरीन गैस रिसने से आज ऐसा ही हादसा हुआ है ।



