Home छत्तीसगढ़ जागो सरकार जागो, अब तो जागो और मजदूरों को घर पहुंचाओ

जागो सरकार जागो, अब तो जागो और मजदूरों को घर पहुंचाओ

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छ्छान पैरी से पेंड्रा जा रहे मज़दूर (फोटो धर्मराज महापात्र माकपा)

रायपुर, (इंडिया न्यूज रूम):- रात 1.15 का समय है, घर के बाहर टहलते देखा तो दिल भर आया , चार नन्हे बच्चे डग भरते पैदल मदर्स डे के दिन अपनी माताओ , पिता व अन्य साथियों के साथ छछान पैरी से निकलकर रात के अंधेरे को चीरते हुए पेंड्रा रोड की ओर निकल पड़े है। ये किसी दूसरे प्रदेश के प्रवासी मजदूर नहीं अपने ही छत्तीसगढ़ प्रदेश के निर्माता साथी है, क्या इन्हे अपने घरों पर पहुंचने के लिये भी सड़क की खाक छाननी होगी ? इस सवाल का जवाब तो प्रदेश सरकार और उनके जिम्मेवार अधिकारियों को देना ही होगा ।

माकपा व सीटू कार्यकर्ता ने उनके रात रुकने की व्यवस्था कर दी है, उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचाने भी इस काम में लगे नागरिक संगठनों के साथ मिलकर पहल की जा रही है, लेकिन सरकार और उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए इस कार्य के जिम्मेदार अधिकारियों, जिला प्रशासन को भी तो दिखता होगा । ये किसी और प्रदेश नहीं अपने प्रदेश के ही एक जगह से दूसरे जगह जाने वाले राज्य के निर्माणकर्ता मजदूर हैं , जिनको उनके घर पहुंचने की जवाबदेही तो तय होगी और अगर वह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो रही है तो यह सरकार की जिम्मेवारी है कि ऐसे अफसरों को दंडित करे, लेकिन राज्य के श्रमिको की यह हालत कतई स्वीकार नहीं की जाएगी । ठीक इसी तरह प्रदेश के सभी सीमाओं पर ही अन्य प्रदेश से आ रहे प्रवासी मजदूरों को रुकने, खाने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर वे जिन प्रदेशों के है वहां की सरकारों के साथ समन्वय बनाकर किसी अधिकारी की जवाबदेही तय कर उन्हें वहीं से सम्बन्धित प्रदेशों में भेजने की व्यवस्था की जाए , ताकि सड़को की खाक छानते रास्ते में ही दम तोड़ने से उन्हें बचाया जाए ।

श्रम विभाग के सचिव से लेकर निचले स्तर तक के अमले को इसके लिए मैदान में उतरकर काम में लगाया जाय । ये अपेक्षा हर जिम्मेदार नागरिक की है। श्रमिक संगठन सीटू के लोगों ने सारे प्रदेश में जगह जगह अपनी सीमित क्षमता से मदद की है और लगातार कर भी रहे हैं ये जानकारी देते हुए धर्मराज महापात्र बताते हैं कि भोजन, राशन और सब्जी के साथ-साथ मज़दूरों को उनके घर गांव तक भेजने के मोर्चे पर बहुत ज्यादा काम अभी भी बाक़ी है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद जगह जगह मजदूरों को पुलिस प्रशासन स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से थोड़ा बहुत भोजन तो करा देता है किंतु बस में परिवहन की व्यवस्था के बिना उस मार्ग पर चल रही ट्रकों में किसी तरह मजदूरों को बिठा कर उनके गांव की ओर भेजने की व्यवस्था कर रहा है जो कि घातक भी है। जबकि प्रदेश में हजारों की संख्या में विभिन्न सरकारी , निजी बसों के इतने दिनों से लॉकडाउन में खड़े रहने का समुचित उपयोग इस हेतु किया जाना चाहिए।

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