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क्वारंटाइन होने से बेहतर मौत को गले लगाना बेहतर समझा इस युवक ने .. पढ़े क्या है मामला

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file photo

गढ़वा/झारखंड:- कोरोना के संक्रमण के खतरे को भांपते हुए ग्रामीण इलाकों में भी सक्रियता बरती जा रही है | अपवाद ही सही लेकिन यह सक्रियता एक परिवार के लिए खतरनाक साबित हुई | परिजनों ने अपने बेटे को एतिहातन क्वारंटाइन होने को कहा , वो भी अस्पताल या कही और नहीं बल्कि खुद के घर के एक कमरे में | लेकिन 19 वर्षीय इस युवक को क्वारंटाइन होना इतना नागवार गुजरा कि उसने मौत को गले लगा लिया | घटना झारखंड के गढ़वा जिले के रंका थाना क्षेत्र के चुटिया पंचायत के मंझवार टोला हाटदोहर गांव की है | कोरोना का खतरा भांपते हुए इस युवक की मां ने उसे घर लौट आने को कहा था ।

लॉकडाउन में तमाम परेशानियों को झेलते हुए यह बेटा मां की पुकार पर 1700 KM का सफर तय कर महाराष्ट्र के शोलापुर से अपने घर पहुंचा था । घर लौटने पर जब मां समेत अन्य परिजनों ने उसे कोरंटाइन में रहने को कहा तो बात बेटे को इतनी नागवार गुजरी कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

हाटदोहर गांव निवासी नारायण गौड़ का पुत्र मुकेश कुमार सोमवार की दोपहर 12 बजे महाराष्ट्र के शोलापुर से अपने घर लौटा था । घर आने के बाद मां-बाप ने उसे कोरंटाइन रहने को कहा। बेटे को समझाया कि गांव के लोग कह रहे हैं कि होम कोरंटाइन रहे या फिर उसे गांव के क्वारंटाइन सेंटर में भेजना होगा। इस पर मुकेश ने कुछ नहीं कहा। उसने मां से पूछा कि क्या खाना बना है? मां ने बताया कि आलू की सब्जी और भात बना है। इसके बाद उसने अपने साथ लाया बिस्किट खाकर पानी पीया और अपना बैग लेकर निकल गया।

घर से कुछ ही दूर जाकर एक पेड़ पर उसने गमछा बांधकर फांसी लगा ली। बेटे के देर तक नहीं लौटने पर मां उसे खोजने निकली तो पेड़ पर बेटे को का शव देख चीखने-चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग पहुंचे। उसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। थाना प्रभारी ने शव को पेड़ से उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा | प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जब तक उसे पेड़ से उतारा गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मौके पर रंका थाना से पहुंचे पीएसआई विजय ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है। घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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