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श्रम कानूनों का निलंबन मज़दूर विरोधी होने के साथ अनैतिक और अव्यवहारिक भी: अज़ीम प्रेमजी

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वेबडेस्क (एजेंसी):- विप्रो के संस्थापक चेयरमैन अज़ीम प्रेमजी ने लिखा है कि, “पिछले सप्ताह 16 श्रमिकों का ट्रेन से कटना एक अविस्मरणीय त्रासदी है।” शनिवार, 16 मई को इकनॉमिक टाइम्स में लिखे लेख में अज़ीम प्रेमजी ने श्रमिकों के संदर्भ में कई मुद्दों को उठाया और कुछ सुझाव भी दिया है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश के सबसे कमजोर व गरीब तबके के लोग इन दिनों जिन बहुत सारे कष्टों का सामना कर रहे हैं उनमें यह सबसे ज्यादा हृदयविदारक त्रासदी है।

इसी संदर्भ में उन्होंने कई राज्य सरकारों द्वारा श्रम कानूनों में किए जा रहे परिवर्तनों पर क्षोभ व्यक्त किया है। इन परिवर्तनों के तहत औद्योगिक विवाद का निपटारा, व्यवसायिक सुरक्षा, कार्य दशा, ट्रेड यूनियन, न्यूनतम मजदूरी, प्रवासी मज़दूरों से संबंधित कानून सहित कई श्रम कानूनों को निलंबित किया गया है। उन्होंने इस निर्णय को एक गलत विकल्प कहा है जिसके द्वारा श्रमिक और व्यवसाय को परस्पर विरोधी बना दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि ” पिछले कुछ दशकों में श्रम कानूनों में कई परिवर्तन किए गए हैं। श्रम कानूनों में ये परिवर्तन उद्योगों के सर्वोच्च अवरोधकारी तत्वों में बमुश्किल शामिल रहे हैं। इस दौरान सामाजिक सुरक्षा उपायों को बढ़ाया नहीं गया है। जिसके कारण रोजगारों में लगे हुए लोगों की जिंदगी की अनिश्चितता को और बदतर बना दिया गया है। पहले से ही नरम श्रम कानूनों को और ज्यादा कमजोर बना देने से आर्थिक गतिविधियों में कोई उछाल नहीं आएगा। बल्कि इससे कम आय वालों और गरीबों की स्थिति और खराब होगी।”

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