सीपीएम के पोलित ब्यूरो ने मोदी सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन का फ़ैसला किया है. प्रेस कांफ्रेंस में आज पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने आरोप लगाया.
सीपीएम ने कोरोनावायरस से लड़ने के मोदी सरकार के तौर तरीक़ों पर करारा हमला बोला है. प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि 16 जून को सरकारी नीतियों के ख़िलाफ़ देशव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा. इस प्रदर्शन में सीपीएम की सभी ईकाइयां हिस्सा लेंगी. साथ ही मास्क और शारीरिक दूरी जैसे नियमों का भी पालन किया जाएगा. सीपीएम के इस प्रदर्शन की चार मांगें हैं.
- तुरंत 7500 रुपए अगले 6 महीने तक उन परिवारों को दिया जाए, जो आयकर की सीमा में नहीं आते.
- सरकारी गोदामों में करोड़ों किलोग्राम अनाज सड़ रहे हैं. इसे चूहे खा रहे हैं, लेकिन सरकार ग़रीबों में इसे नहीं बांट रही है. तत्काल 10 किलोग्राम अनाज अगले 6 महीने तक हर ज़रूरतमंद व्यक्तियों को दिया जाए.
- बड़े पैमाने पर प्रवासी मज़दूर अपने घर पहुंचे हैं. ग्रामीण इलाक़ों में 200 वर्किंग दिन उन लोगों को मनरेगा के तहत काम दिए जाएं. इसके लिए सरकार तत्काल फंड आवंटित करे. शहरी इलाक़ों में भी रोज़गार की व्यवस्था की जाए. लॉकडाउन के बाद 15 करोड़ लोग बेरोज़गार हुए हैं. उन लोगों को बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए.
- हमारी राष्ट्रीय संपत्ति की लूट बंद कीजिए. निजीकरण की प्रक्रिया बंद कीजिए. श्रम क़ानूनों में बदलाव बंद कीजिए.
सीपीएम ने एक बार फिर कोरोनावायरस से लड़ने को लेकर केरल मॉडल की तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि जिस मॉडल की पूरी दुनिया में तारीफ़ हो रही है, उससे मोदी सरकार ने सीख लेने की कोई कोशिश नहीं की. सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार ने लॉकडाउन का एकतरफ़ा फ़ैसला किया. इसमें किसी को भी तैयारी करने का कोई मौक़ा नहीं दिया गया. आज करोड़ों लोग इससे प्रभावित है. लोग भूख और बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं. येचुरी ने कहा कि इससे बचा जा सकता था. सरकार बदतर होते हालात में राहत दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
CPM ने क्यों मोदी सरकार के पैकेज को कहा लूट का पैकेज, सीताराम येचुरी की 10 बड़ी बातेंअसल में 2 लाख करोड़ है जिसे मोदी सरकार 20 लाख करोड़ का पैकेज बता रही है- सीताराम येचुरीसीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, कर्नाटक की बीजीपी सरकार प्रवासी मजदूरों को बंधुआ से भी बदतर मान रही है
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जिस तरह लॉकडाउन किया, वो पूरी तरह अवैज्ञानिक था. इस दौरान जो किए जाने की दरकार थी, सरकार वो करने में नाकाम रही. उन्होंने कहा कि जब लॉकडाउन का ऐलान किया गया तो देश में मात्र 546 केस थे और 10 लोगों की मौत हुई थी. आज 2 लाख 7 हज़ार से ज़्यादा मामले हो चुके हैं. 5800 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. येचुरी ने सवालिया लहज़े में कहा कि इस लॉकडाउन का हासिल क्या है?
‘सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रही है सरकार’
सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार कोरोनावायरस से लड़ने के बजाए आरएसएस के एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई में जुटी है. सीपीएम ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान सरकार असहमति ज़ाहिर करने वालों पर यूएपीए, राजद्रोह और एनएसए जैसे क्रूर क़ानून लगाकर उन्हें जेलों में भर रही है और देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के काम में जुटी है.
उन्होंने एक बार मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पिछली योजनाओं और ऐलानों को शामिल कर देश को गुमराह किया गया. येचुरी ने कहा कि बीते दिनों सरकार ने ऐलान किया कि रबी फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है. सीपीएम ने इसे झूठ करार दिया. येचुरी के मुताबिक़ एमएसपी में वास्तविक बढ़ोतरी मात्र 2 फ़ीसदी की हुई है, लेकिन सरकार इसे 50 फ़ीसदी बता रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में किसानों पर क़र्ज़ के बोझ और बढ़ेंगे और किसानों की बदहाली के लिए सिर्फ़ मोदी सरकार ज़िम्मेदार होगी.
उन्होंने देश में श्रम क़ानूनों में बदलाव, निजीकरण की कोशिश का पुरज़ोर विरोध करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार जो कदम उठा रही है, वो पूरी तरह नाकाफ़ी है. उन्होंने कहा कि देश में इस वक़्त आपूर्ति की कमी नहीं है, लेकिन डिमांड में भारी कमी दर्ज हुई है. जब तक मांग को दुरुस्त नहीं किया जाएगा, तब तक अर्थव्यवस्था ठीक नहीं होगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें कोरोनावायरस से लड़ रही हैं, लेकिन केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक मदद नहीं दे रही.
‘राज्यों को मदद दे सरकार’
उन्होंने कहा कि राज्यों का जो वाजिब हक़ है, वो भी उन्हें नहीं दिया जा रहा. सीपीएम ने जीएसटी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई राज्य लगातार केंद्र से जीएसटी का अपना हिस्सा मांग रहा है. सीताराम येचुरी ने पीएम केयर्स के तहत जमा की गई रकम की पारदर्शिता का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि किसी को नहीं पता कि इस रकम को कहां ख़र्च किया जा रहा है. येचुरी ने कहा कि देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा लचर है. सीपीएम ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य और यूनिवर्सल हेल्थ केयर पर कम से 3 फ़ीसदी ख़र्च कीजिए.
डिजिटल डिवाइड
लॉकडाउन के बाद के हालात में ऑनलाइन परीक्षा और क्लास को लेकर भी येचुरी ने चिंता ज़ाहिर की और कहा कि अकादमिक सत्र का नए सिरे से शेड्यूल तय किया जाना चाहिए. उन्होंने देहात के इलाक़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों की तरह वहां डिजिटल पहुंच नहीं है. इंटरनेट के अभाव के चलते देहातों में रहने वाले बच्चे पिछड़ जाएंगे. उन्होंने कहा कि इसके ज़रिए देश में डिजिटल डिवाइड पैदा करने की कोशिश की जा रही है.
प्रेस कांफ्रेंस की शुरुआत में सीपीएम महासचिव ने निसर्ग तूफ़ान पर चिंता ज़ाहिर करते हुए सबको सचेत रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि सीपीएम को उम्मीद है कि सरकार इस पर उचित कदम उठाएगी.


