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अनलॉक-01 में निजी स्कूलों की मनमानी बढ़ी…. ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर पालकों पर फीस जमा करने बनाया जा रहा दबाव

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रायपुर। कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा स्कूलों के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों का राजधानी रायपुर में निजी स्कूलों द्वारा खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए बच्चों के पालकों से ऑनलाईन पढ़ाई के नाम पर फीस वसूलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।  अनलॉक 01 में प्रवेश करने के बाद जिस तेज गति से पूरे भारत में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे है उसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने स्कूलों को अगस्त में खोले जाने हेतु दिशा-निर्देश जारी किए है। केन्द्र सरकार की दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए कोरोना की महामारी से प्रभावित राज्यों द्वारा भी स्कूलों के लिए नये निर्देश जारी कर दिए गए है।

छत्तीसगढ़ राज्य में भी स्कूलों के लिए इस संबंध में निर्देश जारी किए गए है। स्कूलों के संचालक स्कूल नहीं खोलने के निर्देश का तो पालन कर रहे है लेकिन बच्चों के पालकों से फीस वसूलने के लिए नया तरीका ढूंढकर अब ऑनलाईन पढ़ाई का बहाना बना रहे है। निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा बच्चों के पालकों को मोबाईल फोन पर मैसेज भेजा जा रहा है जिसमें ऑनलाईन पढ़ाई के नाम पर 16 जून से पहले पहले फीस की किस्त जमा कर एडमिशन सुनिश्चित करने को कहा जा रहा है जिससे पालक वर्ग भारी परेशान हो रहे है। जबकि सरकार ने ऑनलाईन पढ़ाई कराने और पालकों से फीस लेने के लिए स्कूलों को कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए है।

चूंकि स्कूलें अब तक बंद है तो कोई भी स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के पालकों से फीस वसूली करने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है। इस तरह सरकार के निर्देशा का उल्लंघन करते हुए निजी स्कूलों द्वारा पालकों को मोबाईल फोन पर मैसेज भेजकर फीस जमा कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।  इधर स्कूलों की मनमानी के खिलाफ छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने और ऑनलाइन क्लासेस और फीस वसूली पर रोक लगाने की मांग किया गया है।   ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन क्लासेस और फीस का मामला तुल पकड़ते जा रहा है। पालक और प्राईवेट स्कूल इस मामले को लेकर रोज आमने-सामने हो रहे है, लेकिन राज्य सरकार या आयोग के द्वारा इस मामले में गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट या सख्त आदेश जारी नहीं किया गया है।

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