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मणिपुर में संकट टला? एनपीपी के चार मंत्री इस्तीफा वापस लेंगे- कोनराड संगमा

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कोनराड संगमा- एन बीरेन सिंह

इंफाल:- पिछले दिनों मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार में मचे घमासान के बाद अब तस्वीर फिर पलटती नजर आ रही है। मणिपुर में बीजेपी की सहयोगी नैशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के जिन 4 मंत्रियों ने एन बीरेन सिंह सरकार से इस्तीफा दिया था, वह अब वापस लेंगे। मेघालय सीएम और एनपीपी चीफ कोनराड संगमा ने बताया कि चारों मंत्री इस्तीफा वापस लेकर बीजेपी की एन बीरेन सिंह सरकार को समर्थन देंगे।

वहीं मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने भी कुछ ऐसा ही दावा किया है। एन बीरेन सिंह से जब पूछा गया कि राज्य का राजनीतिक संकट खत्म हो गया है तो उन्होंने जवाब में कहा, ‘हां। लोग सरकार के साथ हैं, वे हमपर विश्वास और भरोसा करते हैं इसलिए हम हर चीज से उबर सकते हैं। राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं लेकिन लोगों को हकीकत मालूम है।’

मणिपुर की सरकार स्थिर है-बीजेपी
इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा, ‘मणिपुर की सरकार स्थिर है। हमारे पास विधायकों का पर्याप्त समर्थन है और सरकार किसी भी समय असेंबली फ्लोर पर बहुमत साबित करने के लिए तैयार है।’ उन्होंने कहा कि मणिपुर में कोई अस्थिरता नहीं है, इसकी चर्चा सिर्फ सोशल मीडिया पर हो रही है।’

9 विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया था
बता दें कि मणिपुर में राजनीतिक संकट उस समय गहराया था जब 17 जून को 9 विधायकों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इसमें बीजेपी के 3 विधायक भी शामिल थे जिन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही सरकार पर संकट मंडरा रहा था।

हिमंत शर्मा और कोनराड संगमा इंफाल गए थे
विधायकों के इस्तीफे और समर्थन वापस लेने से बिगड़ी स्थिति देख बीजेपी ने रविवार को बीजेपी के संकटमोचक कहे जाने वाले हिमंत बिस्वा शर्मा को अचानक मणिपुर भेजा था। हिमंत शर्मा रविवार रात इंफाल पहुंचे और कई राउंड में बैठक की। उनके साथ मेघालय के सीएम और एनपीपी नेता कोनराड संगमा भी थे।

एनपीपी के विधायकों से समर्थन वापस लेने से ही सरकार खतरे में आई थी। इस वजह से ही कोनराड संगमा को भी मणिपुर भेजा गया था ताकि वह राज्य इकाई यूनिट और बीजेपी के बीच खाई पाटने में मदद कर सकें।

क्या कहता है विधानसभा का गणित
साल 2017 में 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 28 सीटें जीतने के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि बीजेपी के खाते में 21 सीटें आई थी। एनपीपी और नगा पीपल्स फ्रंट के 4 विधायक भी चुनाव में जीते थे। वहीं दूसरी ओर एलजेपी, टीएमसी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट जीती थी। सभी गैर कांग्रेसी और एक कांग्रेस विधायक टी श्यामकुमार के बीजेपी को समर्थन देने के साथ ही गवर्नर नजमा हेमतुल्ला ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

इसके बाद 7 और कांग्रेस विधायक- सनासम बीरा सिंह, गिंनसुआनहउ, ओइनाम लुखोई सिंह, गामथांग हाओकिप, सुरचंद्र सिंह, क्षेत्रीमयूम बीरा सिंह और पाओनम ब्रोजन सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए। इससे बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की संख्या 40 हो गई है। वहीं कांग्रेस ने अपने 8 पूर्व विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की जो कि विधानसभा स्पीकर के पास लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदली स्थिति
हालांकि टी श्यामकुमार के केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति बदल गई। 28 मार्च 2020 में विधानसभा स्पीकर ने उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया। वहीं 8 जून को मणिपुर हाई कोर्ट ने 7 कांग्रेस विधायकों को राज्य विधानसभा में प्रवेश करने से रोक दिया जब तक कि स्पीकर उनके खिलाफ याचिका पर फैसला न दे दे।

इन विधायकों ने दिया इस्तीफा
बता दें कि बीजेपी विधायक एस सुभाषचंद्र सिंह, टीटी हाओकिप और सैमुअल जेनदई के अलावा टीएमसी विधायक टी रॉबिंद्रो सिंह, नैशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक वाइ जॉयकुमार सिंह (डेप्युटी सीएम), एन कायसी, एल जयंता कुमार सिंह, लेतपाओ हाओकिप और निर्दलीय विधायक असबउद्दीन ने गठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस को समर्थन दिया। तीन बीजेपी विधायकों ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस जॉइन कर ली।

पूर्वोत्तर के चाणक्य हैं हिमंत
हिमंत बिस्वा शर्मा को पूर्वोत्तर की राजनीति में चाणक्य के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रविवार को एनपीपी प्रमुख और मेघालय के मुख्यमंत्री कनराड संगमा के साथ इंफाल का दौरा किया था। बता दें कि उत्तर-पूर्व में कमल खिलाने का श्रेय हिमंत बिस्वा शर्मा को जाता है।

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