एल आई सी में IPO का विरोध देशभर में बीमा कर्मी कल करेंगें विरोध प्रदर्शन
रायपुर, 2 जुलाई:- सार्वजनिक क्षेत्र की एल आई सी के IPO की बोली जारी करने के पूर्व लेन देन सलाहकार नियुक्त करने निर्माण निमंत्रण प्रक्रिया का विरोध करते हुए बीमा कर्मचारी कल देश भर में विल्ला धारण कर विरोध दर्ज करेंगे । संगठन के अखिल भारतीय सहसचिव धर्मराज महापात्र ने प्रेस वक्तव्य में उक्त जानकारी देते हुए कहा कि एल एल आई सी ने देश के औद्योगिक विकास और राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय भूमिका अदा की है जो आज भी जारी है । पॉलिसी धारकों की संख्या के मामले में देश के सबसे बड़े बीमाकर्ताओं के रूप में उभरने और विकास करना पूरी तरह से आंतरिक संसाधनों को पैदा करने के माध्यम से किया गया है ।
1956 में केवल 5 करोड़ की प्रारम्भिक पूंजी से यह संस्था बनी इसे सरकार ने बढ़ाकर 2011 में 100 करोड़ कर दिया लेकिन उसके लिए कोई अतिरिक्त पूंजी नहीं दी गई बावजूद इसके इस अल्प पूंजी पर एल आई सी ने आज 32 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति का निर्माण किया है ।यह विस्तार बीमा धारक के पैसे से हुए है अर्थात एल आई सी ने आपसी लाभ वाले समाज की तरह काम किया है , जिसकी एल आई सी के एक हिस्से को बाजार में बेचने का निर्णय लेते समय अनदेखी की जा रही है ।
महापात्र ने कहा कि 245 निजी बीमा कंपनियों को समाहित कर जब जीवन बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण किया गया तो उसका उद्देश्य था जनता की छोटी बचत को एकत्र कर देश के विकास के लिए दीर्धकाल निवेश जुटाना और आम जनता के वंचित तबके तक बीमा कनविस्तर कर बीमा धारक को जोखिम की सुरक्षा के साथ उनके निवेश पर एक अच्छा लाभांश उपलब्ध कराना ।एल आई सी ने इसे बखूबी निभाया। बेचने से उसका सामाजिक उद्देश्य बदलकर निजी शेयर धारकों को अधिकतम लाभ पहुंचाना हो जाएगा जो 40 करोड़ बीमा धारक या राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा ।
महापात्र ने कहा कि यह व्यापक रूप से स्वीकृत तथ्य है कि घरेलू बचत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दुनिया भर में बड़े अर्थशास्त्रियों का यही मानना है कि विदेशी पूजी घरेलू बचत का खराब विकल्प है । ऐसी स्थिति में जहां देश के विकास के लिए भारी संसाधन की आवश्यकता है यह और अधिक महत्वपूर्ण हों जाता है कि घरेलू बचत पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण हो । प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की जो परिकल्पना दी है वह भी तभी सफल होगी जब हर साल अत्यधिक निवेश योग्य अधिशेष उत्पन्न करने वाली संस्था पर सौ प्रतिशत सरकारी नियंत्रण हो । एल आई सी की इक्विटी को बेचने का कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज के कमजोर वर्गो के हितों को बुरी तरह से प्रभावित करेगा । कमजोर वर्गो तक बीमा की पहुंच का सामाजिक उद्देश्य पीछे चला जाएगा और लाभहीन ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा का विस्तार का लक्ष्य बाधित होगा ।
एल आई सी के मूल स्वरूप को छेड़ने से देश की गरीब आबादी और गरीब तबके के हितों का अकल्पनीय नुकसान होगा । संगठन ने केंद्र सरकार से इसे रोकने की मांग करते हुए वित्त मंत्री को भी अन्य यूनियनों के साथ पत्र लिखा है । कल देशव्यापी प्रदर्शन के जरिए बीमा कर्मी कोयला सहित सार्वजनिक उद्योग का निजीकरण रोकने, IPO का फैसला वापस लेने, साधारण बीमा कंपनियों में विनिवेश रोकने, बीमा क्षेत्र में एफ डी आई वृद्धि वापस लेने, बीमा प्रीमियम पर जी एस टी समाप्त करने, पेंशन क्षेत्र में एफ डी आई रोकने, शर्म कानून में परिवर्तन वापस लेने की मांग करते हुए सभी कार्यालयों में बिल्ला धारण कर कार्य करेंगे और कोवीड नियमों का पालन कर विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे । संगठन ने ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी विरोध और कोयला मजदूरों के हड़ताल के साथ भी एकजुटता व्यक्त की है ।



