जयपुर:- राजस्थान विधानसभा स्पीकर डॉ. सीपी जोशी की ओर से सदन की सदस्यता खत्म किए जाने को लेकर जारी नोटिस ने सचिन पायलट और उनके 18 साथी बागी विधायकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्पीकर को पर्याप्त शक्तियां मिली हुई हैं और इनके तहत पायलट बहस तो कर सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला स्पीकर ही लेंगे। ऐसे में गुरुवार को सचिन पायलट गुट राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट में स्पीकर के नोटिस के खिलाफ याचिका पेश की गई। सूत्रों के अनुसार दोपहर 3 बजे इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हो सकती है।
विधानसभा स्पीकर के नोटिस के बाद से पायलट गुट के सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की अटकलें लगाई जा रही थी। अब उन्होंने हाईकोर्ट में विप की वैधानिकता को चुनौती दी है। सचिन पायलट गुट ने कानूनी सलाहकारों की राय के बाद यह कदम उठाया है। माना जा रहा है कि अगर विप की वैधानिकता पर सचिन पायलट गुट को हाई कोर्ट से कोई आदेश या स्टे मिल जाता तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा।
इससे पहले कांग्रेस के मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी की याचिका पर राजस्थान विधानसभा सचिवालय की ओर से सचिन पायलट समेत 19 विधायकों को नोटिस थमाया था। कांग्रेस विधायक दल की हालिया बैठकों में शामिल नहीं होने को लेकर इस नोटिस में विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की मुख्य सचेतक की याचिका का हवाला दिया गया। इन विधायकों से 3 दिन में अपना पक्ष रखने को कहा गया था।
कितनी मुश्किल है सचिन के लिए ये कानून दांव-पेच
सचिन पायलट समेत 19 विधायकों को ये नोटिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191 और सपठित 10वीं अनुसूची के तहत जारी किए गए हैं। साथ ही राजस्थान विधानसभा ‘दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता’ नियम 1989 के प्रावधान के तहत इन नोटिसों ने बागी विधायकों की परेशानी बढ़ा दी है। विधायकी विशेषज्ञों की मानें तो इन कानूनी दांव-पेच में सचिन पायलट गुट के पास कोर्ट की शरण लेने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचा।



