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कोरोना के कारण एयरलाइन सेक्टर में जा चुकी है 4 लाख की नौकरी

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नईदिल्ली। कोरोना वायरस महामारी का सबसे ज्यादा असर एयरलाइन सेक्टर पर पड़ा है। दुनियाभर में विमानों का परिचालन बंद है और विमानन कंपनियों की हालत खस्ता हो गई है। पूरी दुनिया में करीब 4 लाख एयरलाइन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है या उन्हें साफ कह दिया गया है कि उनकी नौकरी जा सकती है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगा रखा है। जो विमान उड़ भी रहे हैं तो उनमें भी यात्रियों की संख्या बहुत कम है। लोग संक्रमण और लंबे समय तक चरंटीन में रहने की आशंका के कारण हवाई यात्रा से बच रहे हैं।

ब्रिटिश एयरवेज, डायजे लुफ्तहांसा एजी, एमिरेट्स एयरलाइन और चंटास एयरवेज लिमिटेड सहित कई विमानन कंपनियों में हजारों कर्मचारियों को निकालने और बिना सैलरी के छुट्टी पर भेजने की घोषणा की है। अमेरिका में भी कई एयरलाइंस इस फिराक में हैं। वहां सितंबर तक लोगों को नौकरी से निकालने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। दरअसल अमेरिका में सरकार के 50 अरब डॉलर के राहत पैकेज में कर्मचारियों को नहीं निकालने की शर्त रखी गई है।

डेल्टा एयरलाइंस इंक, यूनाइट़ेड एयरलाइंस होल्डिंग्स इंक और अमेरिकन एयरलाइंस ग्रुप इंक ने करीब 35 हजार कर्मचारियों को आगाह किया है कि उनकी नौकरी जा सकती है। इस साल के अंत तक इन तीन कंपनियों में एक लाख कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। पायलट और कैबिन क्रू को भी वेतन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है। दुनियाभर में विमानन क्षेत्र में जिन 4 लाख कर्मचारियों की नौकरी गई है, उनमें पायलट और केबिन क्रू भी शामिल हैं जो कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में फ्रंट लाइन पर थे।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक विमानन क्षेत्र से जुड़ी इंडस्ट्रीज में तो नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या 2.5 करोड़ तक जा सकती है। इनमें विमान बनाने बाली कंपनियां, इंजन बनाने वाली कंपनियां, हवाई अड्डे और ट्रेवल एजेंसियां शामिल हैं। अमेरिका में एविएशन सेक्टर में गई एक नौकरी पर होटल और लॉजिंग सेक्टर में 7.5 लोगों की जॉब गई है। एयरबस और बोइंग 30 हजार से अधिक लोगों की छंटनी करने जा रही है।

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