Home छत्तीसगढ़ कोल ब्लॉक नीलामी का देशविरोधी फैसला वापस ले मोदी सरकार

कोल ब्लॉक नीलामी का देशविरोधी फैसला वापस ले मोदी सरकार

498
0

कोयला मंत्री की यात्रा के दौरान रायपुर में सीटू व माकपा ने किया विरोध प्रदर्शन

रायपुर(इंडिया न्यूज़ रूम):- देश के 41 कोल ब्लॉकों को कारपोरेटों को नीलाम करने तथा इसके व्यवसायिक खनन की अनुमति देने के मोदी सरकार के फैसले का तीव्र विरोध करते हुए कोयला मंत्री के रायपुर दौरे के दौरान अपने गुस्से का इजहार करते हुए सीटू ब माकपा कार्यकर्ताओं ने तालाबंदी के नियमों व शारीरिक दूरी कनपलन करते हुए प्रदर्शन किया ।सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने कहा कि कोयला मजदूरों द्वारा केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ कोयला श्रमिकों की 2-4 जुलाई को तीन दिवसीय अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बावजूद केंद्र सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार की बजाय इस सम्पदा कोंबर्चने के रास्ते पर चल रही है जो शर्मनाक है । समर्थन में पूरे समर्थन करते हुए ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने इसे वापस लेने की मांग की है । ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की संपन्न हुई बैठक ने प्रदेश के अन्य हिस्सों के मजदूरों से भी इस दिन एकजुटता कार्यवाही का आव्हान किया ।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार एक ओर आत्मनिर्भरता का दावा करती है और दूसरी ओर देश की सम्पदा को लूटने निजी पूंजी के हवाले करने इसकी बिलिंलगा रहीं है । नेताओ ने कहा कि कोयला के व्यवसायिक खनन का प्रदेश के आदिवासी समुदायों पर पड़ने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव, जैव विविधता और समृद्ध वन्य जीवों के विनाश, राज्यों के अधिकारों और संविधान की संघीय भावना के अतिक्रमण तथा अंतर्राष्ट्रीय पेरिस समझौते की भावना के उल्लंघन को देखते हुए इसके कानूनी पहलुओं पर झारखंड सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को भी कोर्ट में चुनौती देने की मांग की है। इस संबध में मुख्यमत्री महोदय को एक पत्र भी भेजा जा रहा है ।

सीटू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जिन 9 कोल ब्लाक को शामिल किया गया है उनमें से 5 कोल ब्लॉक पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में है। हाथी संरक्षण और विभिन्न कारणों से इसे खनन के लिए ‘नो-गो एरिया’ घोषित किया गया है। वर्ष 2015 में ही हसदेव अरण्य की 20 ग्राम पंचायतों ने इस क्षेत्र में पेसा, वनाधिकार कानून व पांचवी अनुसूची के प्रावधानों का उपयोग करते हुए कोयला खनन के विरोध में प्रस्ताव पारित किए हैं। आदिवासी समुदायों को हमारे देश के संविधान से मिले इन अधिकारों के मद्देनजर केंद्र सरकार का यह निर्णय गैर-कानूनी है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोलगेट मामले में दिए गए निर्णय के भी खिलाफ है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय संपदा का उपयोग सार्वजनिक हित में देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोयला जैसी प्राकृतिक संपदा पर किसी सरकार का नहीं, देश की जनता और उसकी आगामी पीढ़ियों का अधिकार है, जिसे जैव विविधता और वन्य जीवन का विनाश कर के कारपोरेट मुनाफे के लिए खोदने-बेचने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कोरोना की आड़ में अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर जो कदम उठाए जा रहे हैं, वह ‘आत्मनिर्भर भारत’ नहीं, ‘अमेरिका पर निर्भर भारत’ का ही निर्माण करेगा। निर्यात के लिए कोयले के व्यावसायिक खनन की अनुमति देने से घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत बढ़ेगी और सीमेंट, इस्पात, खाद व ऊर्जा उत्पादन भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दस्तावेजों के ही अनुसार, देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए कोयला खदानों के खनन की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार के नियंत्रण में वर्तमान में हो रहा कोयला उत्पादन भविष्य में ऊर्जा की जरूरत भी पूरा करने में सक्षम हैं।

उन्होने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भी कोयला खदानों की नीलामी के खिलाफ प्रदेश के वन सम्पदा की रक्षा के लिए इसका विरोध करने और झारखंड सरकार की तर्ज पर इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अपील की। मोदी सरकार की इस विनाशकारी नीतियों के खिलाफ कोयला उद्योग के मजदूरों की 18= अगस्त को पुनः प्रस्तावित एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए उस दिन पूरे प्रदेश में उनके समर्थन में एकजुटता कार्यवाही का भी ऐलान किया । इस प्रदर्शन में प्रदीप मिश्रा, अजय, विभाष पैतूंडी, उसद शामिल थे ।

धर्मराज महापात्र
सचिव, सीटू
छत्तीसगढ़
9425205198

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here