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बस्तर की खुशहाली और समृद्धी के लिए बोधघाट परियोजना जरूरी – भूपेश बघेल

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  • पुनर्वास एवं व्यवस्थापन के बाद ही प्रभावितों की भूमि ली जाएगी
  • बोधघाट परियोजना के निर्माण से क्षेत्र में बढ़ेगी सिंचाई क्षमता

जगदलपुर। प्रस्तावित बोधघाट परियोजना के विकास के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर क्षेत्र के सांसद, विधायक और गणमान्य जन प्रतिनिधियों की बैठक लेकर कहा कि इंद्रावती नदी के जल का सदुपयोग कर बस्तर की खुशहाली और समृद्ध बनाने के लिए बोधघाट परियोजना जरूरी है। उन्होने कहा कि परियोजना से प्रभावितों के लिए पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की बेहतर व्यवस्था किया जाएगा। विस्थापितों को उनकी जमीन के बदले बेहतर जमीन, मकान के बदले बेहतर मकान दिए जाएंगे। प्रभावितों के पुनर्वास एवं व्यवस्थापन के बाद ही उनकी भूमि ली जाएगी। कोशिश होगी इस प्रोजेक्ट की नहरों के किनारे की सरकारी जमीन प्रभावितों को मिले ताकि वह खेती किसानी बेहतर तरीके से कर सके। उक्त जानकारी जनसंपर्क के माध्यम से मुख्यमंत्री के द्वारा दिया गया है।

बहुउद्देशीय प्रस्तावित बोधघाट परियोजना का मूल लक्ष्य ही एक परियोजना से कई उद्देश्यों की पूर्ति करना है। प्रदेश और बस्तर संभाग की महत्वपूर्ण परियोजना इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना है। लगभग 22 हजार 653 करोड़ रुपए की लागत से बोधघाट परियोजना का विकास दंतेवाडा जिले के गीदम विकासखण्ड के पर्यटन स्थल बारसुर के समीप किया जाना है। परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि वर्तमान में लगभग 13 प्रतिशत सिंचाई क्षमता है इस परियोजना के निर्माण से क्षेत्र में सिंचाई क्षमता 366580 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास होगा। इससे दंतेवाड़ा जिले से 51 गांव, 218 बीजापुर और सुकमा के 90 गांव कुल 359 गांव लाभान्वित होंगे। इसके अलावा परियोजना से 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा। औद्योगिक उपयोग हेतु 500 मि.घ.मी. जल, पेयजल के लिए 30 मि.घ.मी. पानी का उपयोग किया जा सकेगा। मत्स्य पालन में 4824 टन वार्षिक लक्ष्य के साथ पर्यटन के लिए भी इस स्थल का विकास किया जाएगा। इस परियोजना के निर्माण से 42 गांव और 13783.147 हेक्टेयर जमीन डुबान क्षेत्र में आ रहे है। इसमें वन भूमि 5704 हेक्टेयर, निजी भूमि 5010 हेक्टेयर और शासकीय भूमि 3069 हेक्टेयर के करीब आ रही है।
राकेश पांडे
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