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1 जुलाई 24 से लागु होने वाले केंद्रीय कानूनों पर चर्चा, अपराध और साक्ष्य के लिए नयी धाराएँ

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रायपुर 14 मई 2024, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा साक्ष्य अधिनियम, आईपीसी और भारतीय नागरिक सुरक्षा क़ानून में बदलाव के लिए 2023 में विधेयक संसद से पारित करवा के सारी औपचारिकता के बाद अब जुलाई 2024 से देश में लागू किया जा रहा है, इस सम्बन्ध में जागरूकता के लिए मीडिया प्रतिभागियों के साथ वार्तालाप का कार्यक्रम रायपुर में रखा गया था. करीब 175 वर्ष पुराने भारतीय कानूनों में समसामयिक जरूरतों के अनुसार तब्दीली करके इन नये कानूनों को शीघ्र ही लागू किया जाना है इसलिए चुनाव आयोग से विशेष अनुमति ले कर देश भर में ऐसे आयोजन किये जा रहे हैं. केंद्रीय पत्र सूचना कार्यालय द्वारा, पुलिस, लोक अभियोजन विभाग के संयुक्त भागीदारी से 14 मई को रायपुर में ये कार्यक्रम किया गया.

बिलासपुर रेंज के आई जी डॉ संजीव शुक्ल ने इस आयोजन में अपनी बातें रखते हुए कहा कि आतंकवाद, देशद्रोह, संगठित अपराध, वित्तीय अपराध, मॉब लिंचिंग आदि को पहली बार परिभाषित किया गया है.

इन कानूनों में दंड के बजाय न्याय को प्राथमिकता दी गयी है इसलिए ये क़ानून पीड़ित के प्रति केंद्रित क़ानून हैं.पीड़ितों को सरल, सुलभ, समयबद्ध न्याय मिल सके ऐसे प्रावधान किये गए हैं.

जब आईपीसी बनी थी तब साइबर क्राइम, डिजिटल एकोनॉमी नहीं थी,फॉरेन्सिक टेक्नोलाजी में इतनी तरक्की नहीं हुई थी अब इन सब का समा वेश इन नये कानूनों में किया गया है.

कार्यक्रम कि शुरुआत में कृपाशंकर यादव अपरमहानिदेशक पत्र सूचना कार्यालय दिल्ली  ने इस विषय पर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता तथा वातावरण निर्माण कि जरुरत पर जोर दिया. भारत सरकार ने सभी राज्यों में क़ानून और न्याय व्यवस्था में बदलाव के लिए इन नये कानूनों के व्यापक प्रचार प्रसार तथा जरूरतों के अनुसार व्यवस्था बनाने के लिए जागरूकता पर जोर दिया.

लोकअभियोजन उपनिदेशक अविनाश चौरसिया, शैलेश फाये केंद्रीय संचार ब्यूरो, शुभम तोमर, रमेश जयभाए ने भी कार्यशाला को सम्बोधित किया.

वार्तालाप में उपस्थित  विशेषज्ञ ओं ने बताया कि नये आपराधिक कानूनों में – भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 देश में 1 जुलाई 2024 से लागु हो जायेंगे, इसके बाद सभी मामलों में इन कानूनों के तहत ही कार्रवाही की जाएगी. इसके अंतर्गत समय पर न्याय, दण्डकेंद्रित के बदले न्यायकेंद्रित व्यवस्था की जाएगी जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ़ अपराधों में खास तौर पर पीड़ित को  कार्यवाहीयों में असुविधा ना हो तथा जल्दी न्याय मिले इसकी व्यवस्था होगी. भगोड़े आपराधियों और गैर मौजूदगी में भी कोर्ट की कार्यवाही हो, प्रोउद्योगिकी के इस्तेमाल से सजा जल्दी मिले ऐसी प्रक्रिया अपनायी जाएगी. अभियोजन निर्देशालय जिले स्तर पर पुनर्गठित होगा, स्त्री पुरुष तथा तृतीय वर्ग को भी समानता से न्याय मिले, फॉरेन्सिक जाँच को बढ़ावा मिले, पुलिस तथा न्यायधीशों की जवाबदारी बढे ऐसी व्यवस्था की गयी है. प्रतिभागी पत्रकारों ने समय समय पर अपने प्रश्नों से जिज्ञासा शांत करने कि कोशिश की, थाना स्तर पर इंटरनेट,फॉरेन्सिक टीम की अनुपलब्धता पर विचार किया गया. प्रशिक्षित कर्मियों की कमी जैसे मामलों पर आगे चल कर व्यापक बजट की व्यवस्था से इन कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया.

 

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