नई दिल्ली, 16 अगस्त 2024. चुनाव आयोग ने 2 राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा की है. जम्मू – कश्मीर और हरियाणा के लिए चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा की गयी है.
चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया कि अगस्त में नामांकन प्रक्रिया के बाद सितम्बर एवं अक्टूबर महीनों में ये चुनाव होंगे.
जम्मू कश्मीर में वोटिंग 18 सितम्बर को 24 सीटों में पहले चरण, 26 सीटों में 25 सितम्बर को दूसरे चरण तथा 1अक्टूबर को 40 सीटों में तीसरे चरण की वोटिंग होगी. जम्मूकश्मीर में नतीजे 4 अक्टूबर को निकलेंगे.
हरियाणा में एक चरण में 1 अक्टूबर को वोटिंग सभी 90 सीटों पर तथा नतीजे 4 अक्टूबर 2024 को निकलेंगे.
इस बार कुल 90 सीटों में 87लाख 9000 मतदाता भागीदारी करेंगे जिसमें से जम्मू में 47 तथा काश्मीर में 43 विधानसभा सीटें वर्तमान में घोषित की गयी हैं. कश्मीर घाटी की कुल 43 सीटों के लिए चुनाव होने हैं जम्मू काश्मीर में कुल 11800 मतदान केंद्र घोषित किये गए हैं. मतदाताओं का औसत देखा जाय तो औसतन 735 मतदाता प्रति मतदान केंद्र में होंगे.
हरियाणा में कुल 90 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं.2करोड़ एक हजार वोटर इस चुनाव में भागीदारी करेंगे. मतदान केंद्र की संख्या है 20629 है.
सभी पोलिंग बूथ की निगरानी सी सी टी वी कैमरो से की जाएगी. जम्मू काश्मीर में इस दौरान समय सेब, शिकारा, ट्यूलिप भी है.हरियाणा में सूरजकुण्ड का मेला भी इसी कालखंड में होता है.
चुनाव कार्यक्रमों के बाद स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हरियाणा में पिछले 10 वर्षों से भाजपा सरकार सत्तारूढ़ है, इन पिछले कुछ वर्षों में किसानों के आंदोलन के कारण हरियाणा में भाजपा रक्षात्मक स्थिति में है. जेजे पी, लोकदल सहित सहयोगी दल इस बार अब तक भाजपा के साथ चुनाव लड़ने को राजी नही हैं. अग्निवीर योजना और बढ़ती बेरोजगारी के कारण भी सरकार के प्रति असंतोष बहुत है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव की तरह एकजुट होने की बजाय अलग अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं.
इसी प्रकार अगस्त 2019 में केंद्र के हस्ताक्षेप के बाद से जम्मूकश्मीर राज्य से चुनाव नही हुए, इस बीच वहां धारा 370 की कुछ धाराओं को हटाया गया. बड़ी मात्रा में सुरक्षा बलों को वहां तैनात किया गया. काश्मीर में एकाधिक वर्षों तक इंटरनेट बार बार बंद होने की विभीषिका भी छात्रों और व्यवसाइयों को झेलनी पड़ी.
बुनियादी प्रावधानों में बदलाव के बाद जम्मू और लद्दाख के निवासियों में भी नाराजगी देखी जा रही है. रोजगार तथा जीवन निर्वाह के संसाधनों के अभाव के लिए असंतोष दिखाई दे रहा है.



