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ठगी अपराध में गिरफ्तार व्याख्याता दंपत्ति के निलंबन आदेश में सात माह की देरी

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जगदलपुर। मीडिया में चल रही खबरों में प्रशासनिक मशीनरी के सुस्ती के अनेक उदाहरणों में एक इस प्रकरण की बहुत ज्यादा चर्चा है. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में लगभग 3 करोड़  रुपये की ठगी करने के आरोप में जेल में बंद शिक्षक दंपती जाेगेन्द्र यादव और अरुणा यादव को संचालक लोक शिक्षण ने अब जा कर निलंबित कर दिया है। निलंबन का आदेश 12 अगस्त काे जारी किया गया जो कि 4 जनवरी 2024 से प्रभावी होगी.

बता दें कि ठगी का मामला सामने आने के बाद संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण बस्तर से जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच रिपोर्ट जनवरी में ही भेज दी गई थी, लेकिन निलंबन की कार्रवाई लंबित थी। अंततः जारी आदेश में निलंबन की कार्रवाई 7 माह पहले 4 जनवरी 2024 की तिथि से मान्य की गई है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक दंपती द्वारा पैसा दोगुना करने के नाम पर परिचितों व साथी शिक्षकों से पैसा जमा कराया जाता था। यह काम बीसी खेलने के बाद शिक्षक दंपती कई सालों से कर रहे थे। ठगी का मामला जब सामने आया, उस समय जोगेन्द्र यादव शासकीय हाईस्कूल बंडापारा विकासखंड जगदलपुर में प्रभारी प्राचार्य (मूल पद व्याख्याता एलबी) के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी अरूणा यादव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तितिरगांव में व्याख्याता एलबी के पद पर कार्यरत थी।

दोनों पति-पत्नी के विरूद्ध 70 लोगों से तीन करोड़ रुपये की ठगी करने की शिकायत मिली थी। जिसकी जांच पुलिस द्वारा की गई और शिकायत को सही पाए जाने पर अपराध पंजीबद्ध कर दोनों को तीन जनवरी 2024 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था।

अब सवाल यही है कि जिन अधिकारियों के ऊपर ये कार्यवाही करने की जिम्मेदारी थी वे किन दबावों में या किन कारणों से इसमें देर करते रहे.

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