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सुरंग के उस पार से वापस आ चुके हैं परदेसी राम वर्मा, किताब का विमोचन किया डॉ रमन सिंह ने

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रायपुर, छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने डॉ परदेसी राम वर्मा की किताब के विमोचन कार्यक्रम में कहा कि उम्मीद है वे आगामी 10 से 20 बरस और इसी तरह अच्छी रचनाएं लिखते रहेंगे। डॉ रमन सिंह ने कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में कहा इस आत्मकथा में जो प्रभाव दिखता है वो छत्तीसगढ़ की मिट्टी और संस्कृति का प्रभाव है। 75 वर्षों का इतिहास, संस्कृति और परंपरा के साथ व्यक्तित्वों का भी इस किताब में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पंथी नृत्य के पुरोधा देवदास बंजारे पर लिखी किताब “आरूग़ फूल” के विमोचन के लिए जब देवदास बंजारे के साथ परदेसी राम वर्मा का दुर्ग से रायपुर आते हुए सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने का समाचार मिला। बेहद दुखद समय था, फिर उन्होंने अपनी जिजीविषा से रिकवर किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने कहा – डॉ रमन सिंह के पिता और मेरे पिता साथ पढ़ते और हॉकी खेलते थे, डॉ रमन सिंह जब केंद्र के मंत्री से यहां मुख्यमंत्री बन कर आ गए तब मुझे केंद्र में मंत्री बनने का अवसर मिला। डॉ परदेसी राम वर्मा ने पता नहीं सुरंग के पार क्या देखा? सुरंग यानि गरीबी के दिनों में जो जो अनुभव किया उसके बारे में इतने सारगर्भित तरीके से विवरण लिखा।
जिस समय संस्कृति, कलाकृति में आने वाले शब्दों के बारे में हम अगर कहते हैं तो मुद्दा बन जाता है। जब मैने चमचा शब्द कहा तो विवाद हो गया, अब कुछ कहने से डर लगने लगा है।डॉ चरणदास महंत ने आगे कहा डॉ रमन सिंह ने आपका सुख दुख के दिनों में साथ दिया है। आपने इस किताब में चरण दास चोर का भी जिक्र किया है इसी बहाने हबीब तनवीर और छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक योगदान वाले देवदास बंजारे जी का जिक्र किया उन पर “आरुग़ फूल” लिखा है। जितना आपने छत्तीसगढ़ की माटी में रचा बसा लिखा है उस हिसाब से आपका नाम परदेसी गलत रखा गया है आपका नाम अन्तर्देशी या माटी दास होना चाहिए। आपके लिए मैने कुछ पंक्तियां लिखी है –
चार दिन की जिंदगी में किस किस से कतरा के चलो
खाक मै और ख़ाक तुम किस तरह से इतरा कर चलो।
डॉ चरण दास महंत
कार्यक्रम में डॉ परदेसी राम वर्मा ने अपने बचपन से अब तक के जीवन के अनुभवों का रोचक विवरण सुनाया।
डॉ सुधीर शर्मा ने किताब के बारे में सारगर्भित वक्तव्य दिया। भिलाई से आई श्रीमती चक्रवर्ती ने किताब तथा लेखक के बारे में अपने वक्तव्य में बताया।
अंत में डॉ स्मिता वर्मा ने आभार व्यक्त किया। विधानसभा अध्यक्ष आवास में आयोजित कार्यक्रम में राजधानी के सुधि साहित्यकारों डॉ सुशील त्रिवेदी, गिरीश पंकज सहित अन्यान्य ने भागीदारी की।

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