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राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा, कथाकार रूपड़ा से दुर्व्यवहार करने वाले कुलपति को हटाने की मांग

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रायपुर। वरिष्ठ कथाकार-उपन्यासकार मनोज रुपड़ा से बदसलूकी करने वाले कुलपति आलोक चक्रवाल को हटाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के रायपुर में लेखक-संस्कृतिकर्मियों और पत्रकारों ने आज सड़क पर उतरकर प्रतिवाद दर्ज किया और राष्ट्रपति के नाम पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।

लेखक-पत्रकार और संस्कृतिकर्मियों ने अंबेडकर चौक से राजभवन ( अब लोक भवन ) तक पैदल मार्च किया और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लेखक-पत्रकार और संस्कृतिकर्मी जब राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो सुरक्षाकर्मियों ने लोकभवन मार्ग के बड़े गेट को बंद कर दिया। लेखकों और नागरिकों को गेट खुलवाने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ी। अंततः ज्ञापन स्वीकार करने के लिए केवल दो व्यक्तियों पीसी रथ एवं राजकुमार सोनी को ही राजभवन तक जाने की अनुमति दी गई।

सामाजिक कामों में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले डॉक्टर राकेश गुप्ता ने लेखक मनोज रुपड़ा के साथ कुलपति के व्यवहार को दुर्भाग्यजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुलपति चक्रवाल ने पद की गरिमा का माखौल उड़ाया है। उन्हें एक मिनट भी पद में बने रहने का अधिकार नहीं है।

जन संस्कृति मंच से संबंद्ध कवयित्री रूपेंद्र तिवारी ने कहा कि एक लेखक के साथ बदसलूकी करने के बाद कुलपति ने स्वयं को बौना साबित कर दिया है। उन्होंने कुलपति को पद से हटाने की मांग की।
पत्रकार और संस्कृतिकर्मी पीसी रथ ने इसे निंदनीय घटना बताते हुए अमर्यादित व्यवहार करने वाले अयोग्य कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की। चापलूसों से घिरे रहने वाले कुलपति को हमेशा हां में हां मिलाने वाले लोगों की आदत है एक समर्थ रचनाकार की साफगोई वे बर्दाश्त नहीं कर पाए और घटिया व्यवहार पर उतर आए। संस्कृतिकर्मी तथा पत्रकार राजकुमार सोनी ने प्रतिवाद सभा में बताया कि देशभर के लेखकों और बुद्धिजीवियों ने मनोज रुपड़ा के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है। उन्होंने कहा कि दक्षिणपंथी ताकतें शब्दों की सत्ता से सदैव भय खाती है और सच से घबराती है। कुलपति को एक लेखक की बात इसलिए खराब लगी क्योंकि लेखक ने सच बोला था।
प्रतिवाद सभा में प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा के साथी मिन्हाज असद, जनवादी लेखक संघ के पीसी रथ, नंदन ध्रुव, पत्रकार रुचिर गर्ग, समीर दीवान, सुदीप ठाकुर, प्रेस क्लब रायपुर के अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर, संस्कृतिकर्मी नौसान अकरम, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, रंगकर्मी शेखर नाग, बिंदिया नाग, ओपी सिंह, इंद्र राठौर सहित बहुत से प्रबुद्ध जनों ने अपनी राय रखी। सभी साथियों ने कुलपति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

साहित्य अकादमी दिल्ली और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किए एक कार्यक्रम में कुलपति अशोक कुमार चक्रवाल ने वरिष्ठ कथाकार मनोज रुपड़ा के साथ बदसलूकी की थी। यह घटना सात जनवरी की है। चर्चित कथाकार-उपन्यासकार मनोज रुपड़ा ‘ समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन सन्दर्भ’ विषय पर वक्तव्य के देने के लिए बिलासपुर में आमंत्रित किए गए थे। उनके साथ इस आयोजन में मोहन लाल छीपा, जया जादवानी, मीना गुप्त, मुन्ना तिवारी, जयनंदन, महेश कटारे सहित अन्य कई नामचीन रचनाकार शामिल थे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार चक्रवाल हंसी-मजाक और चुटकुलों के साथ जब वक्तव्य दे रहे थे तब अचानक उन्होंने मंच पर विराजमान मनोज रुपड़ा की तरफ देखते हुए पूछा कि- कहीं आप मेरी बातों से बोर तो नहीं हो रहे हैं ? इस पर मनोज रुपड़ा ने कहा कि आप विषय पर नहीं बोल रहे हैं । इस पर कुलपति चक्रवाल भड़क उठे. उन्होंने तत्काल कहा- इनको यहां किसने बुलाया है ? उन्होंने सबके सामने मनोज रुपड़ा को बाहर चले जाने के लिए कहा.

कथाकार मनोज रुपड़ा ने कुलपति के इस व्यवहार का प्रतिवाद किया और आयोजन का बहिष्कार कर निकल गए. आयोजन में अपने प्रिय लेखक को सुनने के लिए जन संस्कृति मंच बिलासपुर के साथी भी मौजूद थे. बिलासपुर जसम के साथियों ने हॉल के बाहर मनोज रुपड़ा से चर्चा की और फिर वे उन्हें अपने साथ लेकर मार्क्सवादी चिंतक राजेश्वर सक्सेना के निवास चले आए।

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