शत प्रतिशत अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के पेंशन और ग्रेच्युटी का मामला
12 अक्टूबर 2010 को डॉ रमन सिंह की सरकार ने शत प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों तथा कर्मचारियों को चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी तथा पांचवे वेतनमान के आधार पर वेतन पेंशन, ग्रेच्युटी देने का आदेश जारी किया था।
विष्णुदेव साय सरकार में वित्त मंत्री ओ पी चौधरी की अगुआई में राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक 22 जुलाई 2026 में सरकार ने “लोकहित ‘ में 2010 के उस निर्णय को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया तथा 1 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पेंशन ग्रेच्युटी को अमान्य करने का आदेश जारी किया ।
रायपुर 18 सितंबर 2026 को रायपुर प्रेस कांफ्रेंस में प्राध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ हरिनारायण दुबे बताते हैं -कांग्रेस की सरकार के निर्णयों को भाजपा की सरकार आने पर राजनैतिक कारणों से निरस्त करना तो देश की जनता ने कई बार देखा किंतु प्रदेश में 15 वर्षों तक समरसता से सरकार चलाने वाले डॉ रमन सिंह की सरकार के ऐसे लोकहित के फैसले जिससे राज्य में उच्च शिक्षा में सेवा दे चुके बुजुर्ग सेवानिवृत प्राध्यापकों तथा कर्मचारियों को सम्मानजनक पेंशन मिल पा रहा था भाजपा की ही विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा बंद कर दिया गया।
प्रदेश के 400 से अधिक प्रदेश के 400 से अधिक रिटायर्ड प्राध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के पेंशन को बंद करने के सरकार के 1 सितंबर के आदेश को लेकर डॉ. डी एन शर्मा तथा निजी विश्वविद्यालय के अन्य प्राध्यापकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर बताया कि शासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालय के प्राध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान के अंतर्गत वेतन तथा पेंशन ग्रेच्युटी के लाभ मिल रहे थे सरकार ने छठवें वेतनमान के लागू होने के बाद भी इन कर्मचारियों को पुराने पांचवें वेतनमान के तहत ही भुगतान जारी रखा था इसके विरोध में पांचवें वेतनमान में पेंशन ग्रेच्युटी तथा वर्तमान में छठवें वेतनमान का वेतन तथा ग्रेच्युटी के मुद्दे पर 80 से अधिक प्राध्यापकों ने हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ के सिंगल बेंच तथा डबल बेंच में अपने पक्ष में फैसला प्राप्त किया था इस फैसले में माननीय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था की उच्च शिक्षा विभाग जो कर्मचारी जिस वेतनमान को प्राप्त करते हुए सेवानिवृत हो रहा है।
उसी के अनुरूप उसे पेंशन पेंशन ग्रेच्युटी एवं अन्य लाभ दिए जाएं इस तरह से माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी अध्यापकों के ही पक्ष में फैसला दिया।

इस फैसले के बाद राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज हो गई, संभवतः इसी से क्षुब्ध हो कर विगत 1 सितंबर को उच्च शिक्षा विभाग तथा 11 सितंबर 2026 को उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करके सेवा निवृत्त प्राध्यापकों को पेंशन , ग्रेच्युटी तथा अन्य लाभ देना बंद करने का निर्णय लिया है।
माननीय हाई कोर्ट के डबल बेंच के आदेश से क्षुब्ध होकर राज्य सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष पुनरीक्षण याचिका दायर की थी जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया है इसके बाद राज्य सरकार ने 27 पेंशनरों के मामले में फिर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है।
ऐसी स्थिति में जब माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों से पेंशनर्स प्राध्यापकों को उनका अधिकार मिलने की स्थिति दिखाई दे रही है तो राज्य सरकार ने 22 अगस्त 2026 की मंत्रिमंडल की बैठक में दमनकारी रवैया अपनाते हुए पांचवें वेतन मन में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी प्रदान करने के डॉक्टर रमन सिंह सरकार द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया तथा इस निर्णय के अनुसरण में 1 सितंबर 2026 तथा 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी करके राज्य के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों को मिल रही पेंशन 1 सितंबर 2026 से बंद कर दी है यहां तक की मनमाना निर्णय लेते हुए जुलाई तथा अगस्त 2026 की पेंशन भी राज्य सरकार ने रोक दिया है विष्णु देव साय सरकार के इस निर्णय से सेवानिवृत्ति प्राप्त , वृद्ध प्राध्यापक तथा कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं सरकार ने उनके सम्मानजनक और गरिमा से जीवन जीने के अधिकार पर ऐसा निर्मम कदम उठाया है जिससे उनके जीवन पर संकट आ गया है।
ऐसी स्थिति में प्राध्यापक संघ द्वारा मांग की गई है कि सरकार तत्काल प्रभाव से 1 सितंबर तथा 11 सितंबर 2026 को जारी पेंशन एवं ग्रेच्युटी बंद करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले तथा सभी पेंशनरों की पेंशन यथावत नियमित करें जुलाई व अगस्त माह की बकाया पेंशन का भुगतान यथा शीघ्र किया जावे उत्पीड़न का रवैया छोड़कर राज्य सरकार माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पेंशन भोगियों के हित में दिए गए आदेशों को तत्काल लागू करें उल्लेखनीय है कि जब छत्तीसगढ़ अंचल में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के संस्थान बहुत कम थे तब से लेकर इन अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय में उच्च शिक्षण की व्यवस्था की गई थी वर्तमान सरकार में कई मंत्री आईएएस , आईपीएस अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तथा राज्य सरकार के उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारी भी इन्हीं महाविद्यालयों से पढ़कर निकले हैं , ऐसी स्थिति में बेहद दुखद है की इन बुजुर्ग पेंशन भोगियों का पेंशन बंद करने जैसा निर्मम निर्णय साय सरकार ले रही है।



