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ठाकुर का कुआं और नमक का दारोगा के किरदार मंच पर, प्रेमचंद जयंती मनाई गई

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जलेस रायपुर ने सावित्री बाई फुले स्कूल में प्रेमचंद जयंती मनाई

रायपुर 31 जुलाई, प्रेमचंद जयंती पर स्कूली बच्चों ने उनकी विभिन्न कहानियों के पात्रों के संवाद प्रस्तुत किए और बेहद आकर्षक पोस्टरों द्वारा प्रेमचंद जी की रचनाओं के महत्वपूर्ण संवादों को उकेरा।
सावित्री बाई फुले सोसायटी द्वारा संचालित अंग्रेजी माध्यम हाई स्कूल सड्डू रायपुर में जनवादी लेखक संघ की टीम इस अवसर पर उपस्थित थी।
डॉ नंदन उपाध्यक्ष प्रदेश जलेस, प्रेमचंद जयंती के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपना वक्तव्य दे रहे थे, उन्होंने कहा –
ज्ञान आखिर क्यों चाहिए
आखिर हमें विद्या या शिक्षा क्यों चाहिए, हम किस उद्देश्य से स्कूल आते हैं?
शिक्षा वह है जो मुक्त करे ऐसा उपनिषदों में लिखा है, यानि पाखण्ड से मुक्ति, अज्ञानता से मुक्ति, असमानता से मुक्ति, गरीबी से मुक्ति । जो ज्यादा पढ़ने लगता है वो अच्छा लिखना भी शुरू कर देता है। प्रेमचंद का लेखन इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह समाज की विद्रूपताओं पर उंगली रखता है।

स्कूल निदेशक अंजू मेश्राम तथा प्राचार्य महोदया के मार्गदर्शन में शिक्षकों के कुशल सहयोग से छात्र छात्राओं ने प्रेमचंद जी के साहित्य के विशिष्ट भागों को इस प्रस्तुति के लिए तैयार किया था। करीब दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में संवादों के माध्यम से प्रेमचंद जी की विभिन्न चर्चित कहानियों तथा उपन्यासों के कुछ सार संवादों को विभिन्न छात्र छात्राओं द्वारा अभिनीत किया गया।


अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का उदघाटन फूलों के गमले में पानी दे कर किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में जलेस प्रदेश सचिव पी सी रथ ने प्रेमचंद जी के रचनाकाल की परिस्थितियों तथा उनके पूर्व के कथाकारों के लेखन की जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह प्रेमचंद जी ने पहले गांधीवाद से प्रभावित आदर्शवादी सुधारवादी लेखन किया और बाद में सोवियत क्रांति से वहां के समाज में आए बदलाव के बाद भारत में रूढ़िवादिता ,उत्पीड़न और शोषण वाले समाज में सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करने वाली गोदान जैसी यथार्थवादी रचनाएं लिखीं। आज के दौर में जब देश में जाति, धर्म, क्षेत्र के आधार पर विभेदकारी ताकतें सक्रिय हैं प्रेमचंद जैसे लेखकों की बहुत जरूरत है।
निदेशक अंजू मेश्राम ने प्रेमचंद के साहित्य से समाज में सकारात्मक बदलाव को ग्रहण करने की जरूरत पर जोर दिया। समाज में महिलाओं की दयनीय स्थिति में बदलाव के लिए प्रेमचंद हमेशा अपने लेखन से प्रेरित करते रहे।
उनकी प्रसिद्ध कहानी ” ठाकुर का कुआं” का प्रभावशाली पाठ करते हुए रंगकर्मी शेखर नाग ने बताया कि आज 100 साल बाद भी देश में हालात ज्यादा नहीं बदले हैं बल्कि दमन और शोषण के तरीके बदल गए हैं इसीलिए जागरूकता, एकजुटता और समता की आज ज्यादा जरूरत है।
व्यंग्य लेखक तथा कथाकार संजय मृदुल ने बच्चों को संबोधित करने के बाद अपने बाल कथा संग्रह की प्रतियां स्कूल लाइब्रेरी हेतु भेंट की।
छात्रा योगिता यादव ने अपनी कविता में
कलम के जादूगर प्रेमचंद
महलों की बातें छोड़ जिन्होंने कुटिया का हाल सुनाया था …..
प्रस्तुत किया।

इसी प्रकार बच्चों की सतत भागीदारी बढ़ाने के लिए कार्यक्रम का संचालन, नाट्यप्रस्तुति, भाषण एवं मौलिक कविताओं का पाठ भी छात्र -छात्राओ द्वारा किया गया।

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