Home छत्तीसगढ़ यदि महिला सशक्त होगी तो परिवार भी सशक्त होगा:अलकनंदा

यदि महिला सशक्त होगी तो परिवार भी सशक्त होगा:अलकनंदा

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  • जागरूकता, सकारात्मक सोच, सामाजिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण पर दिया गया बल
  • स्वास्थ्य एवं पोषण पर गोलमेज सम्मेलन

महासमुंद। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 के उपलक्ष्य में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देशभर में 01 मार्च से 10 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में होटल आकाशिया, महासमुन्द में शनिवार को ‘स्वास्थ्य एवं पोषणÓ विषय पर राउण्ड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया । इस गोलमेज सम्मेलन में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, उनके कारण और निदान तथा पोषण से जुड़ी जानकारियों एवं भ्रांतियों के संबंध में सभी महिला प्रतिभागियों ने अपने सारगर्भित विचार रखे ।

कॉंन्फ्रेस में सभी प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, पोषाहार, महिलाओं की शिक्षा, जागरूकता, प्रशिक्षण, चलित निदर्शन, सामाजिक एवं नैतिक शिक्षा, चिंतन एवं मनन में परिवर्तन, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन, महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण पर अत्यधिक बल दिया। सम्मेलन में सुझाव आया कि स्थानीय स्तर पर जो पोषाहार उपलब्ध है उसकी जानकारी विद्यालयीन पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी सुझाव आया कि आंगनवाड़ी स्कूलों में सभी 05 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य रूप से भेजा जाना चाहिए ताकि उसका सर्वांगीण विकास हो सके और आंगनवाड़ी द्वारा प्रमाणपत्र देने के आधार पर स्कूलों प्रवेश दिया जाना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. परदल, सखी वन स्टॉप सेंटर की टी. दुर्गा ज्योतिराव, पूर्व जनपद सदस्य डॉ. वाणी तिवारी, पूर्व प्राचार्या अरूणा टांडी, पूर्व लेक्चरर सुसबीना खत्री, निदान संस्था की सुरूबीना आसीफ, सुनीता खत्री, सबिना मेनन, रागिनी चंद्राकर, सुरेखा शर्मा, सुधा रात्रे, सीमा रानी प्रधान और महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी ज्योति चतुर ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया ।
महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी ज्योति चतुर ने कहा कि शासन की स्वास्थ्य एवं पोषाहार संबंधी योजनाओं और परियोजनाओं का काफी प्रभाव महिलाओं के जीवन में पड़ा है। पहले लोग आंगनवाड़ी के बारे में जानते नहीं थे लेकिन आज सभी आंगनवाड़ी की महत्ता को पहचानने लगे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना से इस क्षेत्र के लगभग 5000 महिलाओं को लाभ मिला है। इस योजना से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है। अब 90 प्रतिशत प्रसव संस्थागत हो रहे हैं।
वनिता संस्थान की अलकनंदा ने कहा कि समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। यदि महिला सशक्त होगी तो परिवार भी सशक्त होगा । उन्होंने कहा कि महिलाओं को पोषण की महत्ता को समझना होगा। जब तक महिलाओं का पोषण ठीक से नहीं होगा तब तक स्वयं महिला और परिवार का स्वास्थ्य ठीक नहीं हो सकता। सभी के लिए संतुलित आहार जरूरी है।
सखी वन स्टॉप सेंटर की टी. दुर्गाराव ने कहा कि शारीरिक पोषण के साथ ही मानसिक पोषण भी जरूरी है। समाज के लिए समरसता भी जरूरी है । असुरक्षा की भावना से महिलाओं का संतुलित विकास नहीं हो सकता, इसलिए सामाजिक शिक्षा और नैतिक शिक्षा की भी जरूरत है । उन्होंने कहा कि ‘वन स्टॉप सखी सेंटरÓ से अनेक विभागों को जोड़ा गया है। लेकिन समन्वय नहीं होने की वजह से कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है । उन्होंने मांग की वन स्टॉप सखी सेंटर के लिए अलग से सेटअप होना चाहिए।
निदान संस्था का प्रतिनिधित्व करने वाली सुरूबिना आसिफ ने कहा कि मातृवंदना की राशि काफी कम है इसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इसकी राशि को नगद नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि आयुष्मान भारत की तरह एक कार्ड के रूप में तब्दील कर देना चाहिए ताकि उसका लाभ समय-समय पर संबंधित महिला ले सके। पोषण की सामग्री को भी सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए।
पूर्व जनपद सदस्य डॉ वाणी तिवारी ने सुझाव देते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं में पोषण प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए जिस दिन चावल का वितरण किया जाता है उसी दिन, पोषण की जानकार देने के साथ ही, सभी महिलाओं को स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए और नि:शुल्क सेनेटरी पैड का वितरण किया जाना चाहिए।
पूर्व प्राचार्या अरूणा तांडी ने कहा कि एकल और संयुक्त दोनों ही परिवारों में कुपोषण की समस्या समान रूप से है। कुपोषण से निपटने के लिए लोगों की मानसिक सोच में बदलाव जरूरी है। लड़कियों को बचपन से ही शिक्षित होना चाहिए ताकि अपने और अपने परिवार का पोषण कैसे करें, इसकी जानकारी उन्हें मिल सके। इसके लिए परिवार में सकारात्मक सोच होनी चाहिए ताकि पोषण का व्यावहारिक ज्ञान मिल सके ।
पूर्व लेक्चरर सबीना खत्री ने कहा कि संचार माध्यमों में मनोरंजन के साथ ही ज्ञान होना चाहिए ताकि महिलाएं ज्यादा से ज्यादा पोषण संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकें।
मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. प्रदल ने कहा कि योजना की जानकारी और सही क्रियान्वयन की वजह महासमुन्द जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा कि संस्थागत् प्रसव के कारण भी मातृ और शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आयी है । उन्होंने आशा व्यक्त की कि जैसे जैसे लोग जागरूक होते जांएगे इसमे और कमी होती जाएगी।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के अपर महानिदेशक, सुदर्शन पनतोड़े ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन उद्देश्य के बारे में बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 के उपलक्ष्य में देशभर में 01 मार्च से 10 मार्च, 2020 तक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, महिलाओं का सशक्तीकरण, खेल में कौशल और उद्यमिता और भागीदारी, दिव्यांग, उत्तर-पूर्व, द्वीप, आदिवासी, ग्रामीण महिलाएं और कृषि, महिलाओं द्वारा किए गए आविष्कार, जैविक खाद्य, खाद्य प्रसंस्करण, गर्भवती महिलाओं को डीबीटी जारी, आयुष्मान भारत, महिलाओं की सुरक्षा के लिए नियंत्रण केंद्र आदि विषयों पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेस के माध्यम से प्राप्त विचारों और सुझावों से भारत सरकार को अवगत कराया जाएगा।
इस अवसर पर पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के सहायक निदेशक, सुनील कुमार तिवारी सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन, प्रादेशिक लोकसंपर्क कार्यालय, रायपुर के तकनीकी सहायक प्रदीप विश्वकर्मा ने किया ।

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