- ग्रामीणों के लिए निर्रथक था ऑनलाइन कैशलेस की परिकल्पना
- बीएसएनएल के 94700 का बिल नही पटाने से कटा कनेक्सन
दंतेवाड़ा। जिले के नोटबंदी के बाद दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर बसे पालनार गांव को देश का पहला कैशलेस गांव के रूप में नाम दर्ज कराने का गौरव मिला था। कैशलेस लेनदेन शुरू करने के लिए दुकानों में पॉइंट टू सेल मशीन की व्यवस्था की गई थी। यह मशीन वाईफाई के सहारे इंटरनेट से काम करती थी, जिससे आनलाईन भुगतान हो जाता था। वाईफाई के 94700 के बिल का भुगतान ग्राम पंचायत को करना था, लेकिन लंबे समय से भुगतान न होने से वाईफाई के साथ ही इंटरनेट भी विभाग के द्वारा बंद कर दिया गया है।
उल्लेखनिय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि के लिए तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार को पुरस्कृत भी किया था। दंतेवाड़ा जिले के कुआंकुंडा विकासखंड मुख्यालय नकुलनार से 13 किलोमीटर दूर 09 मोहल्ले वाले ग्राम पालनार की जनसंख्या 1961 है, इनमें ज्यादातर लोग पढ़े लिखे नहीं हैं। जिसके चलते ग्रामीण कैशलेस लेनदेन की प्रक्रिया से दूर रहने से यह निर्रथक होकर रह गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा बस्तर को प्रयोगशाला की तरह उपयोग किए जाने का यह एक और ज्वलंत उदाहरण है।
जिस गांव में लोगों के पास इतना पैसा बैंक खाते में होता ही नही कि वे ऑनलाइन कैशलेस का उपयोग कर सके, वहां प्रधानमंत्री को बुलाकर खुली आंखों में सपने देखने जैसा प्रयोग कर बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों को के साथ एक तरह का मजाक किया गया था। इस गांव को कैशलेस बनाने से गांव कभी कैशलेस तो बना नहीं लेकिन इसका एक फायदा जरूर हुआ की ग्राम पालनार में 653 बैंक खाता धारक है,ं इनमें से अधिकतर के पास प्रधानमंत्री जनधन खाता भी है। यह अलग बात है कि बैंक खाते में पैसे के नाम पर शेष कुछ भी नही है।
बीएसएनएल के अनुविभागीय अधिकारी कमलेश यादव ने बताया कि इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के एवज में ग्राम पंचायत पालनार को भुगतान के लिए बिल भेजा जाता था, भुगतान नही होने से कनेक्शन काट दिया गया है।



