कांकेर:- कहते है की जहा चाह है वह राह है …इंसान चाहे तो नामुमकिन को भी मुमकिन कर सकता है अंदुरनी इलाके के लोग आज भी ,..बिना माकूल संसाधन के भी लोग अपना जीवन यापन कर रहे है ..इन दिनों पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर सभी चिंतित है .देश में .सभी जगह लागआउट कर लोगो को घरो से निकलने से मना किया जा रहा है ताकि संक्रमण से बचा जा सके..जहा लोग बचाव के लिए चेहरे पर . मास्क लगा रहे है सेनेटाईजर से हाथो को बार बार धो रहे है ताकि कोरोना के संक्रामक से बचा जा सके।
लेकिन जहा कुछ सुविधा ही नहीं है वहा के लोग किस तरह इस वायरस से अपना बचाव कर रहे है ……जी हां ये कांकेर जिले के नक्सली इलाका आमाबेड़ा के ग्राम कुरुटोला का है जहा . न कोई संचार की व्यवस्था है की देश में क्या हो रहा है .जान सके .लोगो के मुह से ही सुने है की देश में कोरोना वायरस की प्रकोप है ..और इससे बचने के लिए मुह में मास्क व् बार बार हाथ धोना जरुरी है ..लेकिन इस अंदुरनी इलाके में न कोइ मेडिकल दूकान है जहा से वे मास्क खरीद सके और न ही नजदीक में कोई अस्पताल जहा से वे इस वायरस के लिए कुछ संसाधन जुटा सके इसलिए ये लोग एक कोरोना से लड़ने के लिए देशी जुगाड़ से एक अनोखा मास्क का तैयार किये ..वो है सराई पेड़ का पत्ता ..और हाथ धोने के लिए चूल्हे की राख …जिससे वो अपना हाथ की सफाई कर रहे है .. ग्रामीणों का कहना है ..इस बिमारी के बारे में वे सुने है ..की किसी को छूने से ही फैलता है।
इस लिए वे ये निर्णय लिया और पुरे गाव के लोग पत्ते का मास्क पहन कर इस कोरोना से जंग लड़ रहे है …बता दे जिला प्रशासन ने जरुर शहरी क्षेत्र में सभी माकूल ब्यवस्था की होगी लेकिन आन्दुरनी इलाके में कोई व्यबस्था नहीं करने से ग्रामीण खुद इस वायरस से लड़ने का बीड़ा उठाया और पत्ते का मास्क बना कर सभी गाव के लोग पहन रहे है ..सिर्फ इतना ही नहीं लोग अपने गाव को भी लाकडाउन कर रखा है ….की कोई भी अनजान व्यक्ति इस गाव में नहीं आ सके …ग्रामीणों का येभी कहना है 31 मार्च तक वे अपने घर में ही रहेंगे … भले ही लोग बस्तर के लोगो को अनपढ़ व् आबुझ समझते हो लेकिन ये तस्बीर बताने के लिए काफी है की बस्तर के गरीब आदिवासी किस तरह से अपनी व् आपने परिवार की सुरक्षा कैसे कर सटे उनकी इस पहल पर क्षेत्र के चिकित्सक भी ग्रामीणों की तारफ कर उनकी जागरूकता का लोहा मानते है।



