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वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत

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(अनिल मालवीय)
कोरोना वाइरस के कारण आधी दुनिया में मची आपाधापी के चलते भारी उलट फेर होने के संकेत साफ नज़र आ रहे हैं ।

कुछ दिन और ऐसे ही हालात रहे, जैसा की प्रतीत हो रहा है तो वैश्विक राजनीति में भारी बदलाव देखने को मिल सकता है । हो सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति का चुनाव हार जाएं ।वहां ऐसा राष्ट्रपति चुना जा सकता है जो रूस और चीन दोनों के साथ मधुर संबंध का नजरिया रखे । यह बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि, नज़र दौड़ाएं तो पाएंगे कि विश्वस्तर पर बीते तीन चार वर्षो में कई देशों में खासी सक्रियता बढ़ी है ।

इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, उत्तर कोरिया, रूस, ईरान आदि का झुकाव चीन की तरफ बढ़ा है जो एक शक्तिशाली गठबंधन की तरफ इशारा कर रहे हैं। इन देशों को गठबंधन के लिए अमेरिका ने मजबूर किया है । अमेरिकी हुक्मरान कभी सीरिया, कभी ईरान, कभी पाकिस्तान को अपने इशारे पर चलने और उनकी बात न मानने पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का काम कर रहे थे । इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को भी उसी डंडे से हांकने का प्रयास किया, जैसा कभी उनके पूर्ववर्ती ने इराक के साथ किया था। परंतु, ट्रंप का नहीं सीआइए का आंकलन पूरी तरह गलत निकला । इसका परिणाम सबके सामने है। पेंटागन की पूरे विश्व में इतनी थू -थू पहले कभी नहीं हुई थी । किस तरह अमेरिका और उसके सहयोगी देश कोरोना वाइरस का आतंक भुगत रहे हैं । सबके सामने है । यही नहीं कोरोना की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आए भूचाल का लाभ भी चाइना को मिला उसने न सिर्फ सस्ता क्रूड खरीदा बल्कि उसकी कंपनियों ने शेयर बाजार का जमकर लाभ उठाया है ।

अंतरराष्टीय स्तर पर चाइना की साख में इजाफा हुआ है अब भारत की बात करें तो उसे भी भारी नुकसान तो हुआ है। परंतु अमेरिका के मुकाबले काफी कम। हालांकि ,जिस तरह से चीन भारत के चारों तरफ घेराबंदी कर रहा है उसे देखते हुए बहुत फूँक -फूंक कर कदम रखना पड़ेगा । बांग्लादेश,श्रीलंका और नेपाल का भरोसा भारत पर कम हुआ है । पाकिस्तान के साथ कैसे रिश्ते हैं यह किसी से छिपा नहीं है । भाजपा की सरकार जब से केंद्र में आई है देश का रुझान अमेरिका की तरफ बढ़ा है ये बात किसी से छिपी नहीं है । वहीं रूस से दूरी बढ़ी है । पिछले सात दशक में पहली बार रूस की सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों के साथ युद्धाभ्यास किया था । जो नये गठबंधन को स्पष्ट कर रहे हैं । केंद्र सरकार को अपनी विदेश नीति पर नये सिरे से शीघ्र सोचना होगा ताकि आने वाले नुकसान को कम किया जा सके ।

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