नई दिल्ली / बुलंदशहर | देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिंदू – मुस्लिम एकता की बेहतरीन नज़ीर देखने को मिली। यहां एक हिंदू पड़ोसी की अर्थी को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उस वक़्त अपना कांधा दिया जब कोरोना वायरस के खौफ से मृतक के रिश्तेदारों ने अर्थी से किनारा कर लिया। मामला ज़िले के आंनद विहार इलाक़े का है। बताया जा रहा है कि यहां शनिवार की सुबह इलाके के ही रहने वाले रवि शंकर का अचानक देहांत हो गया। रवि शंकर यहां अपने दो बेटे और पत्नी के साथ रहते थे। देहांत की खबर रिश्तेदारों को दी गई। लेकिन लॉकडाउन और कोरोना के ख़तरे के चलते रिश्तेदार अंतिम संस्कार के लिए रवि शंकर के घर नहीं पहुंचे।
जिसके बाद मृतक के परिजनों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि अंतिम संस्कार कैसे किया जाय। मृतक के परिजन अभी इस समस्या का समाधान ढूंढ ही रहे थे कि इलाक़े के रहने वाले मुस्लिम उनके लिए फरिश्ता बनकर सामने आ गए। मुसलमानों ने रवि के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठा लिया। उन्होंने ना सिर्फ अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोर मृतक के परिजनों की आर्थिक मदद की बल्कि अर्थी को अपने कंधों पर उठाकर श्मशान घाट तक पहुंचाया।
मुसलमानों द्वारा ले जाई गई इस शव यात्रा की सबसे दिलचस्प बात ये रही कि इस दौरान मुसलमानों ने हिंदू रीति रावाज के साथ राम नाम सत्य है का जमकर उद्घोष भी किया। मुसलमानों ने उसी राम नाम को सत्य बताया जिस राम के जयकारे के साथ झारखंड में तबरेज अंसारी की हत्या कर दी गई थी। राम के नाम पर मुसलमानों के साथ हिंसा करने वालों को बुलंदशहर के मुसलमानों ने बेहतरीन अंदाज़ में आइना दिखाया है।


