नई दिल्ली:- कोरोना वायरस महामारी (Novel Coronavirus Outbreak) के कारण परीक्षा को आयोजित करने में विश्वविद्यालयों की परेशानियों को देखते हुए यूजीसी ने आखिरकार फैसला ले लिया। यूजीसी (UGC) ने घोषणा की है कि COVID-19 के कारण परीक्षा आयोजित करने में कठिनाई का सामना करने वाले विश्वविद्यालयों को पिछले सेमेस्टर में आंतरिक मूल्यांकन और प्रदर्शन के आधार पर छात्रों ग्रेड देने होंगे।
लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार अंतिम दिशानिर्देशों में उच्च शिक्षा क्षेत्र के नियामक ने यह प्रावधान किया है कि यदि पिछले सेमेस्टर का परिणाम उपलब्ध नहीं है, तो पहले वर्ष के आधार पर आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर 100% मूल्यांकन किया जा सकता है। इंटरनल असेसमेंट मूल्यांकन में प्रारंभिक, मिड-सेमेस्टर, आंतरिक मूल्यांकन या छात्र को प्रोमोट करने के लिए कुछ भी नाम दिया जा सकता है, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने दिशानिर्देशों पर जोर देते हुए यह एडवाजरी जारी की।
यूजीसी (UGC) ने विश्वविद्यालयों से कहा कि वे कम समय अवधि में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वैकल्पिक और सरलीकृत तरीके और परीक्षा के तरीकों को अपनाएं। जिससे कि वक्त की बचत हो सके।
An Expert Committee was set up by @HRDMinistry to assist UGC to address the concerns of university students, regarding academic calendar and examinations. pic.twitter.com/lcItEiz49W
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) April 29, 2020
विश्वविद्यालयों ने 3 से 2 घंटे तक के समय को कम करके परीक्षाओं के कुशल और नए तरीके अपनाने की भी सलाह दी, नियामक में यह भी सुविधा दी गई है कि जो छात्र अपने ग्रेड में सुधार करना चाहते हैं, उन्हें किसी अन्य अवसर की अनुमति दी जानी चाहिए। यूजीसी ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि ऐसे में जब भी परिस्थितियां सामान्य होती है, उन्हें यह अवसर दिए जाने की अनुमति देनी चाहिए और साथ ही एक शिकायत निवारण तंत्र भी होना चाहिए, जो छात्र शिकायतों की निगरानी कर सके। यूजीसी ने इसके लिए एक हेल्पलाइन भी जारी करने की बात कही है। इन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि जहां परीक्षा आयोजित करना मुश्किल है, वहां विश्वविद्यालय आंतरिक मूल्यांकन के पैटर्न के आधार पर छात्रों को 50% अंक दे सकते हैं और शेष 50% अंक पिछले सेमेस्टर में प्रदर्शन के आधार पर दिए जा सकते हैं।
इसके अलावा कहा गया है कि इस लॉकडाउन की अवधि को सभी छात्रों द्वारा ‘भाग लेने’ के रूप में माना जाएगा। विश्वविद्यालय स्काइप या अन्य मीटिंग ऐप्स के माध्यम से प्रैक्टिकल एग्जाम और वाइवा- आयोजित कर सकते हैं और मिड सेमेस्टर में आगामी परीक्षा सेमेस्टर के दौरान प्रैक्टिकल एग्जाम भी आयोजित करने के दिशा-निर्देश सुझाए गए हैं। यूजीसी ने एम फिल या पीएचडी छात्रों के लिए छह महीने की अवधि बढ़ाने के अनुमति दी है।
सितंबर में नया सत्र शुरू
यूजीसी का कहना है कि टर्मिनल सेमेस्टर के छात्रों के लिए परीक्षा जुलाई के महीने में आयोजित की जाएगी। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक कोविड-19 सेल का गठन किया जाएगा। इसे अकादमिक कैलेंडर और परीक्षाओं से संबंधित छात्रों के मुद्दों को हल करने के लिए सशक्त बनाया जाएगा। कमेटी ने अपनी एक अन्य सिफारिश में कहा, “जहां प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए नया शैक्षणिक सत्र 1 सितंबर से शुरू किया जाए, वहीं द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों के लिए यह शैक्षणिक सत्र 1 अगस्त से शुरू किया जा सकता है।”



