सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार के ताज़ा फ़ैसले से अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटने वाली. उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का एक ही रास्ता है कि आप घरेलू मांगों में बढ़ोतरी करें. ये तभी होगा जब लोगों के हाथ में पैसे होंगे. इसके लिए आपको घरेलू निवेश बढ़ाने होंगे. लेकिन सरकार ने प्राइवेट कैपिटल बढ़ाने पर ज़ोर दिया.”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कोरोनावायरस से लड़ने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने कई सवाल उठाए हैं. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार का ताज़ा ऐलान सिर्फ़ उद्योगपतियों की जेब भरने वाला है. उन्होंने इसे ‘संपत्ति को लूटने वाला’ ऐलान करार दिया. उन्होंने ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के बदले मात्र 2 लाख करोड़ रुपए का ताज़ा ऐलान किया है.
सीताराम येचुरी ने आरोप लगाया कि पहले की बजट घोषणाओं को भी ताज़ा ऐलान में शामिल कर ये जताने की कोशिश की गई कि मोदी सरकार देश को 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दे रही है, लेकिन वास्तव में सरकार ने मात्र 2.11 लाख करोड़ रुपए का ही पैकेज दिया है.
उन्होंने कोविड-19 से लड़ने के मोदी सरकार के तौर-तरीक़ों को नाकाम करार दिया. सीताराम येचुरी ने कहा, “मोदी सरकार ने देश को ऐसा भ्रम दिया कि लॉकडाउन ही इसका इलाज है. असल में लॉकडाउन के ज़रिए आप कुछ समय हासिल कर सकते हैं और अगर इस समय के दौरान बढ़िया काम नहीं किया तो हालात और बिगड़ जाते हैं. मोदी सरकार ने ऐसा ही किया.”
सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार के ताज़ा फ़ैसले से अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटने वाली. उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का एक ही रास्ता है कि आप घरेलू मांगों में बढ़ोतरी करें. ये तभी होगा जब लोगों के हाथ में पैसे होंगे. इसके लिए आपको घरेलू निवेश बढ़ाने होंगे. लेकिन सरकार ने प्राइवेट कैपिटल बढ़ाने पर ज़ोर दिया.”
येचुरी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की तरफ़ से ऐलान के बाद बीते कुछ दिनों से वित्त मंत्री टुकड़ों में जिस तरह आवंटन समझा रही हैं, उसमें ग़रीबों के लिए कोई बड़ा प्रावधान नहीं है. सीपीएम महासचिव ने कहा, “इस बार के बजट में 30.42 लाख करोड़ रुपए के ख़र्च की योजना थी. कितना ख़र्च कर रहे हैं आप? ताज़ा घोषणा में सरकार को बजट से बाहर निकलना था. नए ऐलान करने थे तब जाकर ये वास्तव में स्टिमुलस पैकेज हो पाता.”
येचुरी के मुताबिक़ पुरानी घोषणाओं को सरकार ने इसमें शामिल कर देश को बरगलाने का काम किया है. सीताराम येचुरी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जो बातें कहीं, उनमें से प्रमुख बातें निम्नलिखित है:
1. सभी सेक्टर्स के निजीकरण में जुटी है सरकार. ये क्रोनी कैपिटलिज़्म का रास्ता है. कई सारे उद्योगपति बैंकों के हज़ारों करोड़ रुपए लेकर फ़रार हो गए हैं. फिर भी इनके हाथ मज़बूत करने की कोशिश की जा रही है.
2. घरेलू मांग बढ़ाने पर ही अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर आ सकती है. ये तभी होगा जब लोगों के हाथ में पैसे होंगे. इसके लिए घरेलू निवेश बढ़ाना होगा.
3. सरकार ने इतनी सारी योजनाओं का ऐलान किया, लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में ख़र्च बढ़ाने पर कुछ नहीं कहा. स्वास्थ्य पर केंद्र सरकार अपनी जीडीपी का मात्र 0.7 फ़ीसदी ख़र्च कर रही है. कई देशों में जीडीपी का 10 फ़ीसदी तक ख़र्च होता है. हमारा मानना है कि कम से कम जीडीपी का 2-3 फ़ीसदी ख़र्च कीजिए. स्वास्थ्य में हमारा ख़र्च बहुत कम है.
4. सरकार जांच पर ज़ोर नहीं दे रही है. कई मुल्कों में प्रति दस लाख की आबादी में 30 हज़ार से ज़्यादा टेस्ट हो रहे हैं. अपने यहां ये आंकड़ा बहुत कम है.
5. सरकार के ताज़ा ऐलान में उनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया जो इस महामारी से सबसे ज़्यादा लड़ रहे हैं. डॉक्टरों और नर्सों को जो सुरक्षा उपकरण चाहिए, उसकी व्यवस्था नहीं की गई.
6. देश में कोरोनावायरस के बाद 14 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं. इन लोगों के लिए क्या प्रावधान किए गए?
7. हमने कहा था कि जो भी व्यक्ति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आता, उन सबको अगले तीन महीने तक 7,500 रुपए महीना दीजिए. ये किया जा सकता है.
8. जो अनाज गोदामों में पड़े हैं, उसे आप ज़रूरतमंदों में बांटिए. हमने कहा था कि अगले 6 महीने तक 10 किलोग्राम अनाज हर ज़रूरतमंद परिवार को दीजिए. इससे ज़्यादा अनाज गोदामों में पड़े हुए हैं. वो सड़ रहे हैं.
9. सरकार ने ताज़ा ऐलान में जीडीपी का 2 फ़ीसदी भी ख़र्च नहीं किया है. इस पैकेज में सरकार का ताज़ा ख़र्च मात्र 2.11 लाख करोड़ रुपए का है. ये हमारी जीडीपी का मात्र 2 फ़ीसदी है.
10. बजट में इस बार 30.42 लाख करोड़ रुपए का ऐलान किया गया था. उसमें से कितना ख़र्च कर रहे हैं हम? हमें अगर देश की मदद करनी थी तो उस बजट से बाहर जाकर अतिरिक्त पैसों का ऐलान करना था. तब ये वास्तव में स्टिमुलस पैकेज होगा. सी पी एम महासचिव के इन सवालों का जवाब सरकार अभी तक नही दे सकी है और मीडिया में ये सवाल तैर रहे हैं।



