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अमेरिका में पुलिस की नस्लीय हरकतों के विरोध में अवाम सड़कों पर

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25 मई के दिन अमेरिका में दो White पुलिसकर्मियों ने एक ब्लैक नागरिक को पकड़ लिया। एक पुलिसकर्मी ने अपना घुटना उस Black युवक की गर्दन पर टिका दिया। धरती पर पड़ा वह युवक दर्द से कराहता रहा, बिलबिलाता रहा, उसके मुंह से दो ही बातें निकल पा रही थीं, प्लीज अपना घुटना हटा लो “I can’t Breathe” यानी मैं सांस नहीं ले पा रहा हूँ। पुलिस का घुटना ब्लैक नागरिक की गर्दन पर, और युवक का मुंह नीचे धरती में धंसा हुआ। ठीक 9 मिनट तक अमेरिकी पुलिसकर्मी ने उस ब्लैक नागरिक की गर्दन पर घुटना दबाए रखा। जब आसपास के नागरिकों ने पुलिसकर्मियों की इस हरकत का विरोध किया तो पुलिसकर्मी उनसे ही झगड़ने लगे।

वहां खड़ी एक व्हाइट औरत ने ही घटनाक्रम की वीडियो बना ली। जो इस समय पूरी दुनिया में वायरल है। हालत गम्भीर होने पर उस युवक को अस्पताल ले जाया गया। जिसके ठीक 30 मिनट के अंदर युवक जिंदगी की जंग में हार गया। उस ब्लैक नागरिक का नाम था “George Floyd”. जॉर्ज पास ही साइनपोलिस नाम की एक जगह पर वर्षों से रह रहा था। पास में ही एक कॉफी शॉप हुआ करती थी। वह अक्सर वही चाय पीने आता था। जॉर्ज उस कॉफ़ी हाउस पर एक जाना पहचाना चेहरा था, उसकी उधारी भी उधर चल रही थी। 25 मई के दिन वह कॉफ़ी पीने गया। लेकिन वहां कॉफ़ी मालिक की जगह एक दूसरा एम्प्लॉयी मिला, जिसने पैसे न मिलने पर कॉफी-सिगरेट वापस करने के लिए कहा। लॉकडाउन के कारण जॉर्ज पर पैसे नहीं थे। इसपर उस नए एम्प्लॉयी ने पुलिस बुला ली। कहा ये भी जा रहा है कि जॉर्ज ने नकली नोट दिए थे। हालांकि बीबीसी की रिपोर्ट पढ़ने पर यही पता चलता है कि उधारी वाली बात सही है।

जॉर्ज शॉप के बाहर ही अपनी कार पार्क करके अपने दोस्तों के साथ कार के नीचे लेटा हुआ था। पुलिसकर्मी कार के पास पहुंचे। पुलिसकर्मियों में से एक ने सीधे बंदूक निकालते हुए जॉर्ज को दोनों हाथ बाहर निकालने के लिए कहा। कार के नीचे से जैसे ही जॉर्ज ने दोनों हाथ बाहर किए, पुलिसकर्मियों ने उसे आधा बाहर खींच लिया। जब जॉर्ज ने इस बात का विरोध किया तो Derek Chauvin नाम के उस व्हाइट पुलिसकर्मी ने जॉर्ज की गर्दन पर अपना घुटना टेक दिया। घुटना इतनी निर्ममता से टिकाया गया था कि जॉर्ज की दम टूटने लगी। उसे सांस लेना ही मुश्किल हो गया। बिलबिलाते जॉर्ज पर पुलिसकर्मियों को जरा सा भी तरस न आया।

पुलिस द्वारा जॉर्ज के प्रति अमानवीयता, Blacks के प्रति व्हाट्स में पूर्वाग्रह का एक नग्न प्रदर्शन था, सीधे बंदूक तान देना, और गर्दन पर 9 मिनट तक बेरहमी से घुटना टिकाए, रखना नस्लीय पूर्वाग्रहों को दिखाता है। जिसने की जॉर्ज को को अपनी बात रखने का एक अदद मौका भी नहीं दिया।

उस दिन से इस मिनट तक पूरे अमेरिका, यहाँ तक कि बगल के देश कनाडा में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों के हाथों में तख्तियां हैं जिनपर लिखा है “Black Lives matters” यानी काले रंग के लोग भी बराबर दर्जे के नागरिक हैं। उनकी जिंदगियां भी महत्वपूर्ण हैं, रंगभेद बन्द करो, अत्याचार बन्द करो।प्रदर्शनकारियों में अधिकतर नागरिक व्हाइट ही हैं।

नीचे जो दृश्य आप देख रहे हैं कोलोरोडो राज्य की राजधानी का है। प्रदर्शनकारी व्हाइट समाज के ही नागरिक हैं जिनपर Racism का आरोप है। अपने आप पर शर्मिंदा होते हुए अमेरिकीवासी सड़कों पर निकल आए हैं। ठीक उसी मुद्रा में लेटे हुए हैं जिसमें मरते वक्त George floyd लेटा हुआ था। प्रदर्शनकारी सामूहिक रूप से माफी और विरोध के अंदाज में कह रहे हैं

“I can’t breathe” “I can’t breathe” जिस तरह जॉर्ज अपने अंतिम समय में पुलिसकर्मियों से कह रहा था।

आप मानिए न मानिए ये बेहद मार्मिक दृश्य है। अमेरिकीवासियों की इस कल्चर पर दिल आता है। जिस पुलिसकर्मी ने जॉर्ज की गर्दन पर अपना घुटना टिकाए रखा था उसकी पत्नी ने अपने पति के Racism से घृणा प्रदर्शित करते हुए Divorce के लिए अप्लाई कर दिया है। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए जिस वाहन को ले जाया जा रहा था उस ड्राइवर ने वाहन चलाने से ही इनकार कर दिया। ये है लिंकन का अमेरिका। जिसपर पूरी आदमजात कौम को गर्व करना चाहिए।

इसे देख दिल्ली दंगों की तस्वीर याद आती है –

मुझे याद है दिल्ली दंगों के दौरान एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें दसों पुलिसकर्मियों और सैनिकों ने तीन चार अधमरे मुस्लिम युवकों को घेरा हुआ था। जिनसे कहा जा रहा था “maad##oo##& खाते यहां का हो, और गाते पाकिस्तान का हो”। उन अर्धविक्षिप्त सी लाशों पर भी देश की पुलिस “वंदे मातरम” गवा रही थी। मरते हुए नागरिकों से “भारत माता की जय” चीखने को कहा जा रहा था। दर्द से कराहते उन भारतीय नागरिकों में से बाद में एक की मौत हो गई थी। लेकिन हम कैसी कौम हो गए हैं?
कि हम में से किसी का भी तब दिल न पिघला, हम में से किसी ने भी माफी न मांगी। पाश्चात्य संस्कृति का विरोध करते करते लग रहा है हम पिशाच संस्कृति की तरफ पढ़ गए हैं। हमें अमेरिकीवासियों से सीखना चाहिए एक नागरिक की जान की कीमत क्या होती है। और ये अकेला दृश्य नहीं है, पूरे अमेरिका में ठीक इसी पैटर्न पर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग माफी मांग रहे हैं।

इस दृश्य को संसार की सभी मानव सभ्यताओं को सहेजकर रखना चाहिए। अपने अपने बच्चों को दिखाना चाहिए शायद हममें इंसानों की कीमत का रच भर भाव जगे। जो फिलहाल नजर नहीं आता।

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